
नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ख़ारिज कर दिया है। इससे पहले उपराष्ट्रपति और राज्य सभा सभापति वेंकैया नायडू कल शाम अपना कार्यक्रम बीच में छोड़कर दिल्ली लौट आए थे।
सोमवार सुबह राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। बता दें कि कांग्रेस समेत सात विपक्षी दलों ने दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव राज्य सभा में दिया था।
उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने अपने 20 पन्नों के आदेश में खारिज करने के कारणों का जिक्र किया है। उपराष्ट्रपति की विवेचना के अनुसार इस प्रस्ताव में एक तकनीकी कमी है। इसके मुताबिक विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर राज्य सभा की सात रिटायर किए हुए सांसदों ने हस्ताक्षर किये थे जो की महाभियोग प्रस्ताव की शर्तों की अनुसार गलत है। रविवार को उपराष्ट्रपति नायडू ने महाभियोग के मसले पर लोकसभा के पूर्व महासचिव और जाने माने संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप, पूर्व विधि सचिव पी के मल्होत्रा, पूर्व विधायी सचिव संजय सिंह और राज्यसभा सचिवालय के अधिकारियों से मुलाकात की थी। विशेषज्ञों ने उपराष्ट्रपति को सलाह दी थी कि प्रथम दृष्टया चीफ जस्टिस पर किसी कदाचार का आरोप तय करने के लिए साक्ष्य नहीं है। अनियमितता से कदाचार तय नहीं होता। संविधान के विशेषज्ञ सुभाष कश्यप ने बताया कि महाभियोग का मकसद न्यायपालिका को परेशान करना है। उन्होंने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 124 में सीजेआई को कदाचार सिद्ध होने पर हटाने की बात है। संविधान में महाभियोग का कहीं उल्लेख नहीं है। इसका मकसद न्यायपालिका को परेशान करना है।
अदालत जा सकते हैं विपक्षी दल
महाभियोग पर कांग्रेस पहले इस बात की घोषणा कर चुकी है कि वह महाभियोग प्रस्ताव खारिज होने पर सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी। हालांकि अब कांग्रेस के पास विकल्प बहुत सीमित हैं पर माना जा रह है कि अदालत जाने की सिवाय उसके पास कोई चारा नहीं है। रविवार को कांग्रेस की तरफ से चीफ जस्टिस पर न्यायिक काम रोक देने का दबाव बनाया गया था। लेकिन अब राज्य सभा सभापति द्वारा महाभियोग प्रस्ताव खारिज होने से इस मामले में एक अन्य मोड़ आ गया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि अब कांग्रेस पार्टी अगला कदम क्या होगा ?