अटल बिहारी वाजपेयी के भाषणों से इंदिरा गांधी को भी लगता था डर, इसलिए एक रैली को रोकने के लिए इस कमजोरी का उठाया फायदा
नई दिल्ली। पूरा देश पूर्व पीएम और अपने प्रिय नेता अटल बिहारी वाजपेयी के निधन से शोक में डूबा है। हर कोई उन्हें अपने शब्दों और तरीके से श्रद्धांजलि दे रहा है। उनकी लोकप्रियता पार्टी के परे थी। अटल बिहारी वाजपेयी पहले ऐसे गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री रहे जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया। वाजपेयी जी को फिल्मों का भी उतना ही शौक था जितना कविताओं से प्यार करते थे। वाजपेयी अपनी कविताओं और फिल्मी किस्सों के जरिये भी कई बार विपक्ष पर वार किया करते थे। उनके वाक पटुता से इंदिरा गांधी को भी डर लगता था। ऐसा ही एक रोचक किस्सा है जिसमें इंदिरा ने वाजपेयी की रैली को रोकने के लिए लोगों की कमजोरी का फायदा उठाया।
दरअसल बात 1977 की है, जब इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ रामलीला मैदान में एक रैली थी। वरिष्ठ पत्रकार तवलीन सिंह ने इस किस्से को बीबीसी के साथ साझा किया है। उनके मुताबिक रैली में वाजपेयी को भी भाषण देना था। ये शायद 'विंटेज वाजपेयी' का सर्वश्रेष्ठ रूप था। हजारों लोग कड़कड़ाती सर्दी और बूंदाबांदी के बीच वाजपेयी को सुनने के लिए जमा हुए थे। इसके बावजूद कि तत्कालीन सरकार ने उन्हें रैली में जाने से रोकने के लिए उस दिन दूरदर्शन पर 1973 की सबसे हिट फिल्म 'बॉबी' दिखाने का फैसला किया था।
तवलीन के मुताबिक, "रैली 4 बजे शुरू हुई थी, अटल जी की बारी आते-आते रात के 9 से ज्यादा का समय हो गया, लेकिन इसके बावजूद उनको सुनने वाले हजारों की संख्या में डटे रहें।'' सरकार की मंशा साफ थी, वह नहीं चाहती थी कि लोग विपक्ष या वाजपेयी के भाषण सुनने पहुंचे। लेकिन वाजपेयी का जादू ही ऐसा था कि लोगों के लिए उनसे बढ़कर और कुछ नहीं था। नतीजा सरकार की एंटरटेनमेंट ट्रिक पूरी तरह फेल हो गई और बड़ी संख्या में लोगों ने अपने प्रिय नेता का भाषण सुना भी और सराहा भी।