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Assembly Elections 2026: केरल और असम में कौन बनेगा मुसलमानों का मसीहा! जानें किन दलों का होगा असली इम्तिहान

Muslim voters impact election: असम में बदरुद्दीन अजमल की पार्टी एआईयूडीएफ और केरल में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग की राजनीति मुसलमानों के इर्द-गिर्द घूमती है। दोनों ही दलों के लिए यह विधानसभा चुनाव किसी इम्तिहान से कम नहीं होगा।

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भारत

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Ashib Khan

Apr 08, 2026

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असम और केरल में मुस्लिम वोट पर सबकी नजर (Photo-IANS)

Muslim vote bank in Assam and Kerala: असम, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव को लेकर 9 अप्रैल को वोटिंग होगी। इन तीनों जगहों पर चुनाव प्रचार थम गया है। चुनाव प्रचार के दौरान सभी राजनीतिक दलों ने अपनी ताकत झोंक दी। असम में कांग्रेस और बीजेपी के बीच मुकाबला माना जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ केरल में वाम मोर्चा (एलडीएफ) और कांग्रेस नीत यूडीएफ आमने-सामने हैं। दोनों ही राज्यों में सरकार बनाने में मुस्लिम वोट बैंक काफी अहम है।

असम में बदरुद्दीन अजमल की पार्टी एआईयूडीएफ और केरल में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग की राजनीति मुसलमानों के इर्द-गिर्द घूमती है। दोनों ही दलों के लिए यह विधानसभा चुनाव किसी इम्तिहान से कम नहीं होगा। 

केरल में करीब 27 प्रतिशत मुसलमान है जबकि असम में करीब 35 प्रतिशत है। इन दोनों राज्यों में मुस्लिम वोट बैंक को काफी अहम माना जाता है।

असम में त्रिकोणीय हुआ मुकाबला

असम में 126 विधानसभा सीटें है। प्रदेश में 726 प्रत्याशी चुनावी मैदान में है। वहीं एआईयूडीएफ महज 27 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। दरअसल, पिछले विधानसभा चुनाव में बदरुद्दीन अजमल की पार्टी AIUDF और कांग्रेस ने मिलकर चुनाव लड़ा था, लेकिन इस बार दोनों दल अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि प्रदेश में मुस्लिम वोट बैंक का बिखराव हो सकता है। 

एआईयूडीएफ के अलग से चुनाव लड़ने से मुस्लिम बहुल सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। दरअसल, बीजेपी-कांग्रेस और एआईयूडीएफ के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है। कांग्रेस मुस्लिम वोटों को वापस अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही है, जबकि अजमल के सामने अपनी पकड़ बनाए रखने की चुनौती है। इसके अलावा बीजेपी हिंदुत्व को मुख्य धारा में रखकर चुनाव लड़ रही है। 

परिसीमन के बाद घटी मुस्लिम सीटें

बता दें कि प्रदेश में परिसीमन के बाद मुस्लिम बहुल सीटों में कमी हुई है। पहले 32 सीटें थी जो कि अब घटकर महज 22 ही रह गई है। हालांकि बदरुद्दीन अजमल के लिए विधानसभा चुनाव इम्तिहान से कम नहीं है, क्योंकि लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। 

केरल में मुस्लिम लीग के भरोसे कांग्रेस

कांग्रेस के लिए केरल विधानसभा चुनाव काफी अहम है। क्योंकि वायनाड सीट से प्रियंका गांधी सांसद है, इससे पहले राहुल गांधी भी इसी सीट से सांसद थे। प्रदेश में कांग्रेस मुस्लिम लीग के भरोसे है। प्रदेश की 140 सीटों में से महज 26 पर ही मुस्लिम लीग ने अपने प्रत्याशी उतारे है। बाकी सीटों पर गठबंधन का समर्थन कर रही है। 

केरल में मुस्लिम राजनीति लंबे समय से IUML के इर्द-गिर्द रही है। राज्य की करीब 43 सीटों पर मुस्लिम वोटर जीत-हार तय करने की स्थिति में हैं। ऐसे में एलडीएफ और यूडीएफ के बीच मुकाबले में यूडीएफ को बढ़त मिलती दिख रही है, जिसका फायदा मुस्लिम लीग को मिल सकता है।

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