
बेंगलूरु। कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद पर बीजेपी नेता बीएस येदियुरप्पा की ताजपोशी हो चुकी है, लेकिन बहुमत साबित करने की चुनौती सबसे बड़ा सिरदर्द है। भारतीय जनता पार्टी के पास 104 सीटें हैं लेकिन बहुमत के लिए 112 सीटें जरूरी हैं। ऐसे में कांग्रेस, जेडीएस, केपीजेपी और बीएसपी के साथ-साथ निर्दलीय विधायकों पर पार्टी की नजर है। पहले माना जा रहा था कि निर्दलीय और केपीजेपी के विधायक बीजेपी को समर्थन आसानी से दे देंगे। लेकिन गुरुवार को विधानसभा के बाहर हुए धरने में शामिल होकर दोनों विधायकों ने सियासी गलियारों का माहौल और गर्म कर दिया है।
कौन हैं कांग्रेसी धरने में गए दोनों विधायक
बीजेपी की उम्मीदों को झटका देने वाले इन विधायकों में एक निर्दलीय है, जबकि एक केपीजेपी से है। निर्दलीय विधायक एच नागेश हैं, जो अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित मुलबगल सीट से जीते हैं। वहीं दूसरे विधायक आर शंकर हैं, जो राणेबेन्नुर विधानसभा से कर्नाटक प्राग्न्यवंथा जनता पार्टी के टिकट पर जीते हैं। उनके अलावा जेडीएस विधायक भी इस धरने में शिरकत कर रहे हैं।
क्या है का अंकगणित और चुनौतियां
बीजेपी को बहुमत के लिए आठ विधायकों की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट में पार्टी को कल अपने विधायकों की सूची सौंपनी है, जबकि राज्यपाल ने सदन में बहुमत साबित करने के लिए उन्हें 15 दिनों का समय दिया है। दोनों विधायकों के कांग्रेस के धरने में शामिल होने से कयास लगाए जा रहे हैं कि इनका बीजेपी से हाथ मिलाना मुश्किल है। हालांकि जेडीएस और कांग्रेस के कुछ विधायकों बीजेपी के संपर्क में हैं। गौरतलब है कि अमित शाह का सियासी इतिहास बताता है कि इस खेल में वो चैंपियन हैं। ऐसे में चुनौतियां तो हैं, लेकिन अमित शाह भी हैं।