
नई दिल्ली। मार्च-अप्रैल, 2019 में लोकसभा चुनाव होना है। चुनाव के लिए एक साल से भी कम समय रह गया है। इससे पहले चुनावी साल में भाजपा को लगातार दो उपचुनावों में विपक्षी एकता ने मात देने काम किया है। इन उपचुनावों में भाजपा को मिली हार से क्षेत्रीय दलों का हौसला बढ़ गया है। बदले हालात को भांपते हुए मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने चुनाव पूर्व बिहार व अन्य राज्यों में सीटों के बंटवारे व हिस्सेदारी को लेकर एनडीए को जरूरी संकेत देने का काम शुरू कर दिया है। नीतिश कुमार ने इस बात के भी संकेत दिए हैं कि वह बिहार में बड़े भाई की भूमिका निभाना चाहते हैं। अगर भाजपा को ये शर्त मंजूर है तो पीएम मोदी और अमित शाह को राष्ट्रीय स्तर पर बड़े भाई में भूमिका से उन्हें भी कोई एतराज नहीं होगा।
एनडीए के बैनर तले लड़ेंगे चुनाव
लोकसभा चुनावों के मद्देनजर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना में जेडीयू के बड़े नेताओं के साथ बैठक की। ये बैठक 2019 के चुनाव को लेकर थी। जेडीयू के नेताओं ने तय किया कि लोकसभा चुनाव में बिहार में जेडीयू की भूमिका बड़े भाई की होगी। इसे भाजपा के लिए बड़ी शर्त माना जा रहा है। आपको याद दिला दें कि पहले जब बिहार में भाजपा और जेडीयू साथ थे तो 40 में से 25 सीट पर जेडीयू के उम्मीदवार होते थे। इस बारे में जेडीयू नेता केसी त्यागी का कहना है कि हम लोग एनडीए के महत्वपूर्ण पार्टनर हैं और एनडीए के बैनर के नीचे ही हम लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। जहां-जहां समाजवादी आंदोलन की पहचान के केंद्र हैं, छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्यप्रदेश हम इन तीनों जगहों पर चुनाव लड़ेंगे और एनडीए को मजबूत करने का काम करेंगे। उन्होंने कहा कि सीटों के बंटवारे को लेकर कोई मतभेद नहीं है। नीतीश कुमार बिहार में गठबंधन के सबसे बड़े नेता हैं। उनकी लोकप्रियता का लाभ एनडीए उठाएगा।
क्लेम नहीं किया
जेडीयू नेता से जब यह पूछा गया कि पूछा कि बड़े भाई होने के नाते क्या आप भाजपा से ज्यादा सीटों पर लड़ेंगे? केसी त्यागी ने कहा कि हमने ऐसा कोऊई क्लेम नहीं किया, हम गठबंधन की बड़ी पार्टी हैं, ये बता सत्य है। इससे पहले नीतीश कुमार के आवास पर जेडीयू महासचिव केसी त्यागी और पवन वर्मा के रणनीतिक सलाहकार प्रशांत किशोर से लंच पर मुलाकात हुई। मुलाकात में यह तय हुआ कि देश की राजनीति में अपनी पहचान बनाने के लिए समाजवादियों को एक करने की मुहिम को आगे बढ़ाया जाए।