
नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव 2019 में पश्चिम बंगाल में शानदार जीत हासिल करने के बाद अब भाजपा के नजर 2021 में विधानसभा चुनाव पर है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त देने के लिए भाजपा ममता बनर्जी के खिलाफ अपने प्लान पर अभी से जुट गई है। तय है कि पश्चिम बंगाल में टीएमसी और भाजपा के बीच जारी तनाव कम होने की गुंजाइश कम है। बता दें कि पार्टी 294 सदस्यीय विधानसभा में कम से कम 250 सीटें पाने की जुगत में है।
हर स्तर पर दीदी को घेरने की तैयारी
हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनाव में राज्य की 42 में से 18 सीटें जीतने में भाजपा को पहली बार कामयाबी मिली है। इससे उत्साहित पार्टी के राष्ट्रीय व प्रदेश स्तर के नेता 2021 के लिए अभी से खाका तैयार करने में जुटे हैं। जानकारी के मुताबिक इसके लिए पार्टी दो मोर्चे पर काम कर रही है। पहला पश्चिम बंगाल के हर विधानसभा क्षेत्र में पार्टी के जनाधार को मजबूत करना। लोगों से तालमेल बढ़ाना और उन्हें पार्टी से जोड़ना। दूसरी बात ये है कि तृणमूल कांग्रेस से पार्टी में आने के इच्छुक नेताओं की पहचान और पार्टी में ज्वाइन कराने की नीति।
बंगाल गौरव का कार्ड खेल सकती है भाजपा
गुजराती अस्मिता की तरह भाजपा 2021 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ बांग्ल गौरव के मुद्दे को ट्रंप कार्ड रूप में उछाल सकती है। इस योजना के तहत पार्टी बंगालियों के हितों के मुद्दे को उछालने का काम कर सकती है। इस दिशा में भाजपा का मुख्य हथियार रोजगार सृजन पर जोर देना भी हो सकता है। औद्योगिकीकरण और राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण (एनआरसी) को पार्टी के एजेंडे में सबसे ऊपर है। ताकि पश्चिम बंगाल में रहने वाले बांग्लादेशी घुसपैठियों को वहो से खदेड़ा जा सके।
टीएमसी का झंडा लहराएगा
दूसरी तरफ तृणमूल कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि 2021 में भी बंगाल में टीएमसी का झंडा लहराएगा। राज्य में सत्ता में आने का भाजपा का सपना समय से पहले चूर-चूर हो जाएगा। आम चुनावों में पश्चिम बंगाल में भाजपा के पक्ष में 40.5 प्रतिशत मत पड़े थे। वर्तमान में भाजपा के विधानसभा में उसके 6 विधायक हैं।
भाजपा का लक्ष्य 250
भाजपा राष्ट्रीय महासचिव और पश्चिम बंगाल प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि लोकसभा चुनाव के लिए हमने 23 सीटों का लक्ष्य रखा था। 18 सीटों पर पार्टी को जीत मिलीं। अब हमारा नया लक्ष्य विधानसभा चुनाव में 250 सीटों का है। इसके लिए हम अभी से आक्रामक चुनावी रणनीति पर काम कर रहे हैं।