पुणे

नाबालिग से कई बार रेप, 8 महीने की गर्भवती हुई पीड़िता, सहमति से संबंध की बात पर अदालत ने किया बरी

Thane Crime News: ठाणे की एक स्पेशल कोर्ट ने 28 साल के एक युवक को बलात्कार के आरोपों से निर्दोष मानकर बाइज्जत बरी कर दिया है। कोर्ट ने पाया कि लड़की की उम्र बताने वाले कागजों में गड़बड़ी थी और लड़की ने खुद माना कि वह युवक को पसंद करती थी। कोर्ट के मुताबिक, उनके बीच के संबंध दोनों की मर्जी से बने थे, न कि जबरदस्ती।

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Apr 25, 2026
thane court acquits man in minor rape case
patrika photo

Thane Crime News: महाराष्ट्र के ठाणे से एक चौंकाने वाला कानूनी फैसला सामने आया है, जहां कोर्ट ने पॉक्सो और रेप के आरोपी को बरी करते हुए आपसी सहमति को मुख्य आधार माना है। 28 वर्षीय समशेर राइस खान पर शादी का झांसा देकर एक नाबालिग से बार-बार दुष्कर्म करने का आरोप था, जिसके चलते पीड़िता 8 महीने की गर्भवती हो गई थी। हालांकि, सुनवाई के दौरान उम्र के सबूतों में हेरफेर और पीड़िता ने माना था कि वह आरोपी को पसंद करती थी और अपनी इच्छा से ही उससे मिलने गई थी।

शादी का झांसा और गर्भावस्था का मामला

बचाव पक्ष के मुताबिक, आरोपी समशेर राइस खान और पीड़िता पड़ोसी था। आरोप था कि नवंबर 2019 में खान पीड़िता को बहला-फुसलाकर एक खाली मकान में ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। यह सिलसिला काफी समय तक चला, जिसका खुलासा तब हुआ जब जनवरी में मेडिकल जांच के दौरान पीड़िता 8 महीने की गर्भवती पाई गई। इसके बाद आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 376(2)(n) और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था।

दस्तावेजों में हेरफेर और उम्र का विवाद

विशेष न्यायाधीश एसपी अग्रवाल की अदालत में सुनवाई के दौरान पीड़िता की उम्र सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई। पीड़िता की मां ने जो जन्म प्रमाण पत्र पेश किया था, उसमें स्पष्ट रूप से ओवर राइटिंग काट-छांट पाई गई। वहीं, मेडिकल टीम की रिपोर्ट के अनुसार घटना के वक्त पीड़िता की उम्र 16 से 17 साल के बीच बताई गई थी। साक्ष्यों में इस अंतर के कारण पीड़िता के नाबालिग होने के दावे पर कानूनी सवाल खड़े हो गए।

सहमति और प्रेम संबंध

अदालत ने अपने फैसले में गौर किया कि पीड़िता ने स्वयं स्वीकार किया था कि वह आरोपी को पसंद करती थी और अपनी मर्जी से उससे मिलने गई थी। कोर्ट ने कहा कि हालातों और बयानों से ऐसा लगता है कि दोनों के बीच लंबे समय से प्रेम संबंध थे और शारीरिक संबंध पूरी तरह से सहमति से बने थे। बचाव पक्ष के तर्कों और सबूतों की कमी को देखते हुए अदालत ने आरोपी को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया।

Published on:
25 Apr 2026 05:39 pm