
Chhattisgarh Politics: प्रदेश भाजपा में अब युवा नेताओं और पदाधिकारियों को संगठनात्मक गतिविधियों में पहले की तुलना में अधिक जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं। पार्टी की रणनीति में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के साथ पहली बार मतदान करने वाले नए वोटरों तक सीधे पहुंच बनाने पर खास जोर दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि जेन-जी आंदोलन के बाद युवा मतदाताओं की राजनीतिक सक्रियता को देखते हुए भाजपा ने भी अपने युवा चेहरों को आगे करने की रणनीति तेज कर दी है।
पार्टी के कार्यक्रमों में युवा नेताओं की सक्रिय भूमिका इसका प्रमुख उदाहरण बन रही है। खासकर तिरंगा यात्रा जैसे अभियानों में स्कूल-कॉलेजों के विद्यार्थियों और पहली बार वोट डालने की उम्र में पहुंच रहे युवाओं से संवाद पर जोर दिया जा रहा है। भाजपा के युवा कार्यकर्ता इन कार्यक्रमों के जरिए राष्ट्रवाद, युवा भागीदारी और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे मुद्दों को लेकर नई पीढ़ी के बीच पहुंच बना रहे हैं।
राजनीतिक दलों के लिए 18 से 25 वर्ष की उम्र के मतदाता लगातार महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। यही वजह है कि भाजपा संगठन अब युवाओं के बीच अपनी पहुंच मजबूत करने के लिए युवा नेताओं को आगे कर रहा है। कॉलेज परिसरों, सामाजिक आयोजनों और पार्टी के अभियानों में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
तिरंगा यात्रा अभियान में भी पार्टी की यह रणनीति साफ नजर आई। बड़ी संख्या में स्कूली विद्यार्थियों, कॉलेज युवाओं और नए मतदाताओं ने देशभक्ति के नारों और तिरंगे के साथ कार्यक्रमों में भाग लिया। भाजपा के युवा पदाधिकारी इन आयोजनों को केवल राजनीतिक कार्यक्रम के बजाए युवाओं से जुड़ने के माध्यम के रूप में भी देख रहे हैं। भाजपा युवा मोर्चा सदस्यता अभियान भी चला रहा है। बस्तर संभाग में मोर्चा कार्यक्रम चल रहा है।
भाजपा की रणनीति में युवा नेताओं को जिम्मेदारी देने का उद्देश्य संगठन में नई ऊर्जा लाने के साथ भविष्य के नेतृत्व की दूसरी पंक्ति तैयार करना भी माना जा रहा है। आने वाले समय में बूथस्तर से लेकर मंडल और जिलास्तर तक युवा कार्यकर्ताओं की सक्रियता और बढ़ सकती है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, युवा वोटरों के मुद्दे पारंपरिक राजनीति से अलग हैं। रोजगार, शिक्षा, तकनीक, स्टार्टअप, खेल और डिजिटल अवसर जैसे विषय उनके लिए ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में पार्टी के युवा चेहरे ही इन मतदाताओं से बेहतर संवाद स्थापित कर सकते हैं।