रायपुर

स्कूलों के पास बिक रहा नशा! हर साल विभागों से जारी होते हैं आदेश-निर्देश, जानें रायपुर शिक्षा विभाग की सच्चाई

Drug Free School Portal: छत्तीसगढ़ में 57,036 स्कूलों में से अब तक केवल 151 ने 'नशा मुक्त विद्यालय' पोर्टल पर पंजीयन कराया है, जबकि सिर्फ 37 स्कूलों ने खुद को नशामुक्त घोषित किया है।
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Aug 12, 2026
Chhattisgarh Drug Free Schools
Chhattisgarh Drug Free Schools: 57 हजार स्कूलों में सिर्फ 151 का पंजीयन(photo-patrika)

CG Drug-Free School Campaign: छत्तीसगढ़ में नया शिक्षा सत्र शुरू होते ही शिक्षा विभाग ने एक बार फिर स्कूलों को 'नशामुक्त विद्यालय' बनाने के निर्देश जारी किए हैं। राज्य परियोजना कार्यालय, समग्र शिक्षा ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और जिला मिशन समन्वयकों को स्कूलों का 'नशा मुक्त विद्यालय' पोर्टल पर पंजीयन और स्व-मूल्यांकन अनिवार्य करने के आदेश दिए हैं। साथ ही स्कूलों के 500 मीटर दायरे को ड्रग-फ्री जोन घोषित कर साइन बोर्ड लगाने के निर्देश भी दिए गए हैं। हालांकि जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल अलग नजर आ रही है।

Drug Free Schools: 57 हजार स्कूलों में सिर्फ 151 का पंजीयन

विभागीय आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में कुल 57,036 विद्यालय हैं, लेकिन अब तक केवल 151 स्कूलों ने ही 'नशा मुक्त विद्यालय' पोर्टल पर पंजीयन कराया है। इनमें भी महज 37 विद्यालयों ने स्वयं को 'नशामुक्त विद्यालय' घोषित किया है। यह आंकड़ा बताता है कि विभाग के निर्देशों का पालन बेहद धीमी गति से हो रहा है।

पंजीयन और स्व-मूल्यांकन अनिवार्य

शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की कार्ययोजना के तहत सभी सरकारी, सहायता प्राप्त, निजी और आवासीय विद्यालयों को पोर्टल पर पंजीयन कर स्व-मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी करनी है। इसके अलावा प्रत्येक जिले में नोडल अधिकारी नियुक्त करने और उनकी जानकारी राज्य कार्यालय को भेजने के भी निर्देश दिए गए हैं।

हर साल आदेश, लेकिन जमीनी असर नहीं

राज्य में वर्षों से स्कूल परिसरों और उनके आसपास नशे पर रोक लगाने के लिए अभियान चलाए जाते रहे हैं। स्कूलों के आसपास सुरक्षा सीमा और जागरूकता के लिए कई निर्देश जारी हुए, लेकिन अधिकांश योजनाएं फाइलों तक ही सीमित रह गईं। न तो व्यापक स्तर पर निगरानी व्यवस्था विकसित हो सकी और न ही नियमों का प्रभावी पालन सुनिश्चित हो पाया।

राजधानी में ही स्कूलों के आसपास बिक रहे नशीले पदार्थ

नशामुक्त विद्यालय अभियान की सबसे बड़ी चुनौती राजधानी रायपुर में ही दिखाई देती है। कई स्कूलों के आसपास खुलेआम नशीले पदार्थों की बिक्री की शिकायतें सामने आती रहती हैं, लेकिन संबंधित विभागों की ओर से प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आती। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्कूलों के आसपास निगरानी और नियमित जांच की व्यवस्था मजबूत किए बिना ऐसे अभियानों का उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता।

कागजों से बाहर निकलने की जरूरत

एक ओर शिक्षा विभाग स्कूलों के 500 मीटर क्षेत्र को ड्रग-फ्री जोन बनाने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर अभियान की प्रगति बेहद सीमित है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल आदेश जारी करने से नहीं, बल्कि नियमित निरीक्षण, स्थानीय प्रशासन की सक्रियता, जागरूकता अभियान और नियमों के सख्त पालन से ही स्कूलों को वास्तव में नशामुक्त बनाया जा सकता है। वर्तमान स्थिति में यह अभियान कागजी प्रक्रिया बनकर रह गया है।

Updated on:
12 Aug 2026 07:33 am
Published on:
12 Aug 2026 07:33 am