
CG News: छत्तीसगढ़ राज्य परिवहन निगम बंद होने के करीब दो दशक बाद भी उसके पूर्व कर्मचारियों के बकाया भुगतान, बहाली और अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े मामले लंबित हैं। वहीं, निगम की बसों की नीलामी को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, निगम बंद होने के समय 600 से अधिक बसें थीं, जिनमें से कई को कबाड़ बताकर कम कीमत पर नीलाम किया गया था। पूर्व कर्मचारियों का दावा है कि इनमें कई बसें संचालन योग्य थीं। दूसरी ओर, निगम के दिवंगत कर्मचारियों के परिजनों को अनुकंपा नियुक्ति देने के लिए राज्य सरकार ने सात सदस्यीय समिति गठित की है।
राज्य परिवहन निगम बंद होने के बाद स्थानीय जिला प्रशासन के माध्यम से बसों की नीलामी की गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, जिन बसों की कीमत उस समय 8 से 10 लाख रुपये बताई गई, उन्हें 50 हजार से एक लाख रुपये तक में बेच दिया गया। कुछ बसों की नीलामी 30 से 35 हजार रुपये में भी होने की बात कही गई है।
पूर्व कर्मचारियों का आरोप है कि नीलामी में शामिल कुछ निजी ऑपरेटरों ने कम कीमत पर बसें खरीदीं और मरम्मत व रंग-रोगन के बाद उन्हें अपने कारोबार में इस्तेमाल किया। हालांकि, नीलामी से जुड़ी सभी परिस्थितियों और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित रिकॉर्ड की जांच जरूरी है।
पूर्व कर्मचारियों के मुताबिक, निगम के पास टाटा और अशोक लेलैंड जैसी कंपनियों की कई बसें थीं, जिनकी स्थिति अच्छी थी और वे संचालन के योग्य थीं। उनका कहना है कि उस समय निर्धारित मानकों के बावजूद कुछ तीन से चार साल पुरानी बसों को भी अनुपयोगी घोषित कर दिया गया।
बिलासपुर स्थित निगम वर्कशॉप के सेवानिवृत्त मैकेनिक रामलाल साहू के अनुसार, कुछ बसों के इंजन की ओवरहॉलिंग और बॉडी की पेंटिंग कराई गई थी। इसके बावजूद उन्हें कंडम घोषित करने का आदेश आया। कर्मचारियों का दावा है कि इस वजह से उन बसों को दूसरे सरकारी विभागों में उपयोग के लिए भेजने की संभावनाएं भी प्रभावित हुईं।
राज्य परिवहन निगम को 31 दिसंबर 2002 को बंद करने की आधिकारिक घोषणा की गई थी। उस समय निगम में करीब 2,250 स्थायी कर्मचारी कार्यरत थे। रिपोर्ट के अनुसार, बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली, जबकि कुछ कर्मचारियों को दूसरे विभागों में समायोजित किया गया।
वहीं, कुछ पूर्व कर्मचारी अब भी निलंबन अवधि के वेतन, बकाया भत्तों और अन्य सेवा लाभों के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। इनमें ऐसे कर्मचारी भी शामिल हैं, जो बहाली और विभागों में समायोजन की मांग कर रहे हैं।
राज्य सरकार ने निगम के दिवंगत कर्मचारियों के परिजनों को अनुकंपा नियुक्ति देने के मामलों पर विचार करने के लिए सात सदस्यीय समिति गठित की है। समिति की रिपोर्ट के बाद प्रस्ताव को मंत्रिपरिषद के समक्ष अनुमोदन के लिए रखा जाना है।
कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद नई अनुकंपा नियुक्ति नीति अधिसूचित होने की संभावना है। इससे लंबित आवेदनों पर आगे की कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, नियुक्ति कब तक मिलेगी और कितने आवेदनों को मंजूरी मिलेगी, यह समिति की रिपोर्ट और सरकार के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा।
राज्य परिवहन निगम की बंदी के बाद बसों की नीलामी, पूर्व कर्मचारियों के बकाया भुगतान और अनुकंपा नियुक्ति जैसे मुद्दे अब भी चर्चा में हैं। पूर्व कर्मचारियों को अपने सेवा लाभ और परिजनों को नियुक्ति मिलने का इंतजार है। वहीं, बसों की नीलामी से जुड़े आरोपों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए संबंधित दस्तावेजों और सरकारी रिकॉर्ड का सामने आना महत्वपूर्ण होगा।