
रायपुर . Chhattisgarh Security Campaign: यह सब जानते हैं बच्चें देश के भविष्य है। समाज में उपस्थित हर वर्ग के अभिभावक आज स्कूल की मोटी फीस चुकाने में कभी कदम पीछे नहीं खींचते। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी के बारे में सोचना भी स्कूल और पलकों का अहम कर्त्तव्य बनता है। सभी पलकों को स्कूल प्रशासन से इस विषय पर चर्चा करना चाहिए और सवाल भी कि उनका बच्चा जहा दिन का 8 घंटा बिताता है वह कितना सुरक्षित है।
देश के भविष्य की चिंता सभी को है मगर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना स्कूल प्रबंधन, पालक और सरकार इन सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में अपनी जिम्मेदारी निभाना चाहिए लेकिन प्रदेश में ऐसा कुछ भी नहीं किया जा रहा है। स्कूल बसों में सरकार द्वारा निर्धारित सुरक्षा उपायों की अनुपालना सुनिश्चित कराए जाने की बात बार - बार कही जाती है लेकिन साल में केवल एक बार फिटनेस चेकअप के नाम पर केवल रसीद काटी जा रही है।
स्कूल में नहीं है फायर सेफ्टी
प्रदेश के कई बड़े स्कूल को छोड़कर किसी भी स्कूल में आग नियंत्रण का कोई प्रबंध नहीं है। हाल ही में सूरत के एक कोचिंग सेंटर भड़के आग ने कई मासूमों की जान ले ली। इस घटना के बाद भी कभी तक न ही सरकार द्वारा कोई कड़ाई से कार्रवाही की गई न ही आग से बचने से कोई कड़े इंतज़ाम।
स्कूल भवन का इंश्योरेंस नहीं
देश के कई राज्यों के स्कूलों को अपनी बिल्डिंग का भी इंश्योरेंस कराने का नियम बनाया है लेकिन अभी भी छत्तीसगढ़ सहित कई अन्य राज्यों में इस प्रकार का कोई नियम नहीं बनाया गया है।यहा तक की माता पिता को यह भी नहीं पता होता जहा उनका बच्चा पढाई करने बैठता है वह बिल्डिंग सेफ है भी की नहीं।हरियाणा के स्कूली शिक्षा विभाग ने सभी स्कूल संचालक को अपने भवन का भी बीमा करने के निर्देश दिए है जिससे छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित हा़े सके।
बच्चों को गुड टच, बैड टच के संबंध में कोई जानकारी नहीं
सभी स्कूलों में पोक्सो एक्ट व गुड टच-बैड टच के संबंध में विद्यार्थियों की जागरूकता के लिए समय समय पर विशेष अभियान चलाना चाहिए। लेकिन इसी प्रकार की कोई भी कार्यक्रम प्रदेश में नहीं चलाए जाते बल्कि स्थानीय NGO'S द्वारा इस विषय पर जानकारियां दी जाती रही हैं।
स्कूल पहुंचने में बच्चों की सुरक्षा
स्कूल पहुंचने में बच्चों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण होश है। इसके लिए सरकार को सभी स्कूलों को गाइड लाइन जारी किया जाना चाहिए। छोटा वैन, बस आदि का इस्तेमाल पूरी सेफ्टी के साथ नहीं किया जा रहा है उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाही करना चाहिए। सभी पलकों की जिम्मेदारी होती है कि खुला ऑटो या पब्लिक ऑटो में बच्चों को स्कूल बिलकुल न भेजे और जब तक सरकार या स्कूल प्रबंधन द्वारा सुरक्षा के बेहतर इंतज़ाम नहीं किये जातें तब तक अभिभावकों को अपने बच्चों के लिए थोड़ा सा वक्त निकाल कर खुद अगर स्कूल तक छोड़ने और लेने जाएंगे तो बच्चे ज्यादा सुरक्षित रहेंगे।
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