Rampur Court Hearing: रामपुर में डबल पैन कार्ड मामले में आजम खान और अब्दुल्ला आजम की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। सजा बढ़ाने की मांग को लेकर सेशन कोर्ट में सुनवाई शुरू हो चुकी है।
Double PAN Card Case:रामपुर में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान से जुड़ा डबल पैन कार्ड मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा के बाद अब इस सजा को बढ़ाने की मांग को लेकर सेशन कोर्ट में सुनवाई शुरू हो चुकी है। गुरुवार को इस मामले की पहली सुनवाई हुई, जिसमें दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है।
इस मामले में सजा बढ़ाने के लिए दो अलग-अलग अपीलें दाखिल की गई हैं। पहली अपील राज्य सरकार की ओर से की गई है, जबकि दूसरी अपील पूर्व मंत्री काजिम अली खान उर्फ नवेद मियां द्वारा दायर की गई है। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब इन दोनों अपीलों की एक साथ सुनवाई की जा रही है। सरकारी पक्ष की ओर से एडीजीसी सीमा राणा अदालत में मजबूत पैरवी कर रही हैं, वहीं नवेद मियां की ओर से अधिवक्ता संदीप सक्सेना सजा बढ़ाने के पक्ष में विस्तार से तर्क रख रहे हैं।
दूसरी ओर, आजम खान और अब्दुल्ला आजम की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता नासिर सुल्तान और विनोद कुमार अदालत में राहत की मांग कर रहे हैं। बचाव पक्ष का स्पष्ट कहना है कि निचली अदालत द्वारा दी गई सजा पहले से ही पर्याप्त है और उसे बढ़ाने का कोई ठोस आधार नहीं है। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि सजा बढ़ाने की अपील को खारिज किया जाए और आरोपियों को राहत प्रदान की जाए।
इस मामले की शुरुआत 30 जुलाई 2019 को हुई थी, जब रामपुर के बीजेपी विधायक आकाश सक्सेना ने सिविल लाइंस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि अब्दुल्ला आजम के पास दो पैन कार्ड हैं और उनका उपयोग किया जा रहा है। जांच के दौरान इस मामले में आजम खान का नाम भी शामिल हो गया, जिससे यह मामला और अधिक संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल बन गया।
17 नवंबर 2025 को एमपी-एमएलए कोर्ट ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए आजम खान और अब्दुल्ला आजम को दोषी करार दिया था। अदालत ने दोनों को सात-सात साल की सजा और 50-50 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी। इस फैसले के बाद ही राज्य सरकार और नवेद मियां ने सजा को और सख्त करने के लिए सेशन कोर्ट का रुख किया।
इस बीच, बचाव पक्ष द्वारा सजा के खिलाफ दाखिल अपील को 20 अप्रैल 2026 को सेशन कोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है। यह फैसला आजम परिवार के लिए बड़ा झटका साबित हुआ। अब बचाव पक्ष इस मामले को लेकर हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रहा है, जिससे आने वाले दिनों में यह मामला और लंबा खिंच सकता है।
फिलहाल, आजम खान और अब्दुल्ला आजम रामपुर जिला जेल में बंद हैं और सेशन कोर्ट की कार्यवाही पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यह देखना बेहद अहम होगा कि सरकारी पक्ष और नवेद मियां सजा बढ़ाने के लिए कितने मजबूत तर्क पेश कर पाते हैं और बचाव पक्ष किस तरह से अदालत को संतुष्ट करता है। इस केस का अगला फैसला न केवल आरोपियों के भविष्य बल्कि प्रदेश की राजनीति पर भी गहरा असर डाल सकता है।