राष्ट्रसंत आचार्य पुलक सागर ने महाशिवरात्रि पर सर्किल जेल में प्रवचन देते हुए कैदियों को कहा कि अपराध करने की वजह से जेल में आए हो, अब इन आदतों को बदल लेना व भगवान श्रीकृष्ण बनकर ही जेल से बाहर आना। अच्छी संगत को अपनाना जिससे जीवन में सुधार हो।
रतलाम. राष्ट्रसंत आचार्य पुलक सागर ने महाशिवरात्रि पर सर्किल जेल में प्रवचन देते हुए कैदियों को कहा कि अपराध करने की वजह से जेल में आए हो, अब इन आदतों को बदल लेना व भगवान श्रीकृष्ण बनकर ही जेल से बाहर आना। अच्छी संगत को अपनाना जिससे जीवन में सुधार हो। आचार्य ने कहा अपराध होने के बाद मन से हारे हुए हो दुनिया से नहीं, अपनी आदतों को बदलते का अवसर मिला है तो अब कृष्ण बनकर ही जेल से बाहर आना।
वाल्मीकि और रत्नाकर जैसे डाकू, संत के सत्संग से जीवन को सफल कर गए। ये संगति का ही असर है, इसे सजा मत समझो, तुम्हे जेल में प्रायश्चित करने भेजा है। ये सुधारालय है यहां जीवन को आनंदमय बनाओ, भगवान् का नाम लो। पांचो समय की नमाज अदा करो, राम का नाम जपो, परमात्मा को याद करो।जेल को मंदिर बना सकतेआचार्य ने कहा कि अपराधी कौन नहीं है, समाज में सब अपराधी है।
दुनिया माल के साथ है मार के साथ नहीं
दुनिया माल के साथ है मार के साथ नहीं है। जब माल था तो सब साथ में घूमा करते थे। श्रद्धा से जेल को भी मंदिर बना सकते हो। जो हो गया, सो हो गया। उसकी अदालत की सजा दिखाई नहीं देती। ऊपर वाले ने ही भेजा है की छोटी अदालत (जेल) में सब ख़त्म कर दो तो, मेरी अदालत में आने की जरुरत ही नहीं पड़ेगी। परिवार बाहर सजा भुगत रहे तुम जेल में बंद हो और परिवार बाहर सजा भुगत रहे होंगे। वे लोग समाज में बैठकर सजा भुगत रहे है। गलतियां महापुरुषों से भी हो जाती है। कैकई और युधिष्ठिर से भी गलतियां हुई है। सोने के महल की चाहत मत रखो, वर्ना लोहे की सलाखे मिला करती है। मां बाप और परमात्मा हमेशा कमजोर बच्चो के साथ ही होता है। उनका ध्यान रखता है। तुम्हारे साथ परमात्मा है, अत: आचरण सुधारो तभी जीवन सफल होगा।
श्रद्धा से जेल को भी मंदिर बनाया जा सकता
आचार्य ने कहा श्रद्धा से जेल को भी मंदिर बनाया जा सकता है। तुम्हारे जीवन मे जो हो गया, सो हो गया। ईश्वर की अदालत जो सजा देती है,वह दिखाई नहीं देती। जेल में तुमको ऊपर वाले ने ही भेजा है, इसलिए यहां रहकर अपने सारे कर्मो का प्रायश्चित कर लो, तो भविष्य में ऊपरवाले की अदालत में जाने की जरुरत ही नहीं पड़ेगी। आचार्यश्री ने कहा कि तुम जेल में बंद हो और परिवार बाहर सजा भुगत रहे होंगे। समाज में बैठकर सजा भुगतना कम नही होता। उन्होंने कहा कि इंसान गलतियों का पुतला होता है। संत रबर की तरह होते है, जो दुसरों की गलतियों को मिटा दिया करते है। गलतियां महापुरुषों से भी होती है। कैकई और युधिष्ठिर से भी गलतियां हुई थी। माता-पिता और परमात्मा हमेशा कमजोर बच्चो के साथ होते है और उनका ध्यान रखते है। तुम्हारे साथ परमात्मा है, अतः आचरण सुधारकर जीवन को सफल बनाओ।
सकल दिगम्बर जैन समाज उपस्थित
प्रवचन के दौरान सर्किल जेल में कलेक्टर रुचिका चैहान, जेलर आरआर डांगी, उपजेलर वीबी प्रसाद, आचार्य श्री पुलक सागर सेवा समिति रतलाम के सरंक्षक चंद्रप्रकाश पांडे, अध्यक्ष राजेश जैन भूजियावाला, सचिव अभय जैन,कमलेश पापरीवाल, मांगीलाल जैन, ओम अग्रवाल,विजय जैन, सुनील जैन, हेमन्त जैन सहित सकल दिगम्बर जैन समाज उपस्थित था।