भारतीय ज्योतिष में सूर्य हो या चंद्र ग्रहण, इनका बड़ा महत्व है। ग्रहण वैसे तो एक खगोलीय घटना होती है, लेकिन इनका ज्योतिष में महत्व होता है। वर्ष 2020 में दो सूर्य ग्रहण होंगे। सूर्य ग्रहण के दौरान अनेक प्रकार की सावधानियां रखना जरूरी है। सूर्य ग्रहण के दौरान सूतक कब शुरू होगा व सूतक के दौरान खराब प्रभाव से किस तरह बचा जाए इस बारे में बता रहे है रतलाम के वरिष्ठ ज्योतिषी अभिषेक जोशी।
रतलाम. भारतीय ज्योतिष में सूर्य हो या चंद्र ग्रहण, इनका बड़ा महत्व है। ग्रहण वैसे तो एक खगोलीय घटना होती है, लेकिन इनका ज्योतिष में महत्व होता है। वर्ष 2020 में दो सूर्य ग्रहण होंगे। सूर्य ग्रहण के दौरान अनेक प्रकार की सावधानियां रखना जरूरी है। सूर्य ग्रहण के दौरान सूतक कब शुरू होगा व सूतक के दौरान खराब प्रभाव से किस तरह बचा जाए इस बारे में बता रहे है रतलाम के वरिष्ठ ज्योतिषी अभिषेक जोशी।
रतलाम के वरिष्ठ ज्योतिषी अभिषेक जोशी ने बताया कि आकाशगंगा में सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना है जिसका ज्योतिष में भी बड़ा महत्व है। वर्ष 2020 में कुल दो सूर्य ग्रहण होंगे। यह सूर्य ग्रहण कौन सी तारीखों को घटित होंगे और दुनिया के कौन से हिस्सों से इनको देखा जा सकता है। इसके साथ ही सूर्य ग्रहण के दौरान आपको क्या सावधानियां बरतनी चाहिए इसके बारे में भी बताएंगे। सूर्य ग्रहण के दौरान सूतक कब शुरु होगा और सूतक के दौरान इसके दुष्प्रभावों से कैसे बच सकते हैं इसकी जानकारी भी आपको दी जाएगी। अच्छे फलों की प्राप्ति के लिये उपयोगी नियम का पालन करने से लाभ होगा।
इस दिन होगा सूर्य ग्रहण
21 जून वलयाकार सूर्य ग्रहण सुबह 9 बजकर 15 मिनट 58 सैंकड से दोपहर 3 बजकर 4 मिनट एक सैंकड तक रहेगा। यह सूर्य ग्रहण भारत, दक्षिण पूर्व यूरोप, हिंद महासागर, प्रशांत महासागर, अफ्रीका और उत्तरी अमेरिका और दक्षिण अमेरिका के प्रमुख हिस्से में देखा जा सकेगा। जबकि दूसरा सूर्य ग्रहण 14-15 दिसंबर को होगा। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण शाम 7 बजकर 3 मिनट 55 सैंकड से रात 12 बजकर 23 मिनट 3 सैंकड तक रहेगा। इसको अफ्रीका का दक्षिणी भाग, अधिकांश दक्षिण अमेरिका, प्रशांत महासागर, अटलांटिक और हिंद महासागर और अंटार्कटिका में देखा जा सकेगा।
पहला सूर्य ग्रहण
ज्योतिषी के अनुसार वर्ष 2020 का पहला सूर्य ग्रहण 21 जून रविवार को होगा। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से देखें तो यह सूर्य ग्रहण मिथुन राशि में कृष्ण पक्ष के दौरान अमावस्या तिथि और मृगशिरा नक्षत्र में पड़ेगा। इसलिए मिथुन राशि के जातकों पर इस सूर्य ग्रहण का प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। जबकि दूसरा व अंतिम सूर्य ग्रहण 14-15 दिसंबर, सोमवार और मंगलवार को दिखेगा। हिंदू पंचांग के अनुसार यह सूर्य ग्रहण वृश्चिक राशि में कृष्ण पक्ष के दौरान ज्येष्ठा नक्षत्र और अमावस्य़ा तिथि को पड़ेगा। इसलिए वृश्चिक राशि के जितने भी जातक हैं उन्हें इस दौरान परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
सूर्य ग्रहण 2020 के दौरान जरूर बरतें यह सावधानियां
- सूर्य ग्रहण को आंखों पर बिना किसी सुरक्षा के नहीं देखना चाहिए।
- ग्रहण के दौरान आपको अपनी आंखों पर ग्रहण के दौरान प्रयोग किये जाने वाले चश्में लगाने चाहिए।
- इसके अलावा सामान्य दर्पण या तस्तरी में पानी डालकर सूर्य ग्रहण को देखा जाना चाहिए।
- इस दौरान तेज किनारों वाली वस्तु जैसे, चाकू, छुरी का प्रयोग न करें।
- ग्रहण के दौरान भोजन और पानी का सेवन न करें।
- इस समय पूजा करना और स्नान करना भी शुभ नहीं माना जाता।
- ग्रहण के दौरान आप आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं।
- ग्रहण के बुरे प्रभावों से बचने के लिये महा मृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
- नीचे दिये गये मंत्र का जाप करना भी आपके लिये अच्छा रहेगा।
मंत्र : ऊं आदित्याय विदमहे दिवाकराय धीमहि तन्न: सूर्य : प्रचोदयात।
सूर्य ग्रहण 2020 के दौरान सूतक काल का समय
ज्योतिषी के अनुसार सूर्य ग्रहण 2020 के अनुसार साल का पहला सूर्य ग्रहण 21 जून को घटित होगा और यह वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा। ग्रहण की अवधि सुबह 9.15.58 से दोपहर ३.4.1 तक है, यह सूर्य ग्रहण भारत के साथ-साथ साउथ ईस्ट यूरोप, हिंद महासागर, प्रशांत महासागर, अफ्रीका और अमेरिका के कुछ भागों से भी देखा जा सकता है। चुंकि सूर्य ग्रहण भारत में भी दृश्य होगा इसलिये सूतक काल भी यहां प्रभावी होगा। सूतक 20 जून को रात 9 बजकर 15 मिनट से शुरू होगा जो 21 जून को सूर्य ग्रहण की समाप्ती के तक दोपहर 3 बजकर 4 मिनट तक रहेगा।