धर्म और अध्यात्म

Bakrid 2026: 27 मई को है ईद-उल-अजहा, जानिए क्यों खास है तपती गर्मी में ‘कुर्बानी’ का यह महापर्व

Bakrid 2026: इस साल भीषण गर्मी के बीच 27 मई को देश-दुनिया में त्याग और समर्पण का महापर्व बकरीद मनाया जाएगा। जानिए इस बार की कुर्बानी का असल संदेश और तपते मौसम में इबादत के लिए मस्जिदों की खास तैयारियां।

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May 25, 2026
Bakrid 2026: Eid-ul-Adha 2026: बकरा मंडियों में सन्नाटा! इस बार क्यों तेजी से बदल रहा है कुर्बानी का तरीका? (फोटो सोर्स : AI@chatgpt)

Bakrid 2026: भीषण गर्मी और चढ़ते पारे के बीच इस साल देश और दुनिया भर के मुस्लिम समुदाय में एक बेहद खास हलचल है। त्याग, समर्पण और अटूट आस्था का प्रतीक 'बकरीद' (Eid-ul-Adha) का त्योहार अब से ठीक 2 दिन बाद यानी 27 मई 2026 (बुधवार) को पूरे अदब और एहतराम के साथ मनाया जाएगा। इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक यह त्योहार हर साल जु अल-हिज्जा के महीने में आता है।

इस बार मई की इस रिकॉर्डतोड़ गर्मी में जब लोग घरों से निकलने से कतरा रहे हैं, तब अकीदतमंदों का जोश देखने लायक है। सुबह की ठंडी हवाओं के बीच मस्जिदों और ईदगाहों में नमाज़ की विशेष तैयारियां की जा रही हैं ताकि लोग सुकून से अल्लाह की इबादत कर सकें।

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27 मई 2026: त्योहार के दिन याद रखें यह समय (Timings)

सूर्योदय (Sunrise): सुबह 05:45 AM
सूर्यास्त (Sunset): शाम 07:02 PM
चन्द्रोदय (Moonrise): दोपहर 03:46 PM
चन्द्रास्त (Moonset): रात 03:18 AM

क्या है बकरीद और हजरत इब्राहिम की कुर्बानी की असली कहानी? (Bakrid History)

बकरीद को सिर्फ एक त्योहार समझना भूल होगी, यह असल में इंसान की अपने परवर्दिगार के प्रति निस्वार्थ वफादारी की दास्तान है। इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, अल्लाह ने पैगंबर हजरत इब्राहिम की आस्था को परखने के लिए उनसे उनकी सबसे प्यारी चीज की कुर्बानी मांगी थी। हजरत इब्राहिम के लिए उनके इकलौते बेटे हजरत इस्माइल से बढ़कर कुछ नहीं था।

अल्लाह के हुक्म पर जैसे ही भारी मन से उन्होंने अपने बेटे की गर्दन पर छुरी चलाने के लिए आंखें बंद कीं, अल्लाह की इबादत और उनके जज्बे को देखकर फरिश्तों ने उनके बेटे की जगह एक दुंबे (भेड़/राम) को रख दिया। जब हजरत इब्राहिम ने आंखें खोलीं, तो उनका बेटा सही-सलामत खड़ा था। इसी महान समर्पण और आज्ञाकारिता की याद में हर साल ईद-उल-अजहा या 'फेस्टिवल ऑफ सैक्रिफाइस' मनाया जाता है।

बकरीद के मुख्य नियम और रस्में (Rituals & Traditions)

बकरीद का दिन सुबह की नमाज़ से लेकर रात के दावतनामे तक कई खूबसूरत रिवाजों से बंधा होता है:

ईद की नमाज और तकबीर: सुबह-सुबह नए कपड़े पहनकर सभी लोग ईदगाह या मस्जिदों में विशेष नमाज़ (Namaz) अदा करते हैं। इसके बाद 'अल्लाहू अकबर' (अल्लाह सबसे बड़ा है) की तकबीर गूंजती है।

कुर्बानी (Qurbani): नमाज़ के बाद शरिया के नियमों के तहत बकरे, भेड़ या अन्य हलाल जानवरों की कुर्बानी दी जाती है।

तीन हिस्सों का गणित (Distribution of Meat): कुर्बानी के गोश्त को बराबर तीन हिस्सों में बांटा जाता है।

पहला हिस्सा: गरीबों और जरूरतमंदों के लिए।
दूसरा हिस्सा: रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए।
तीसरा हिस्सा: खुद के परिवार के लिए।

दान और जकात: इस दिन केवल गोश्त बांटना ही नहीं, बल्कि 'जकात' (दान) और वित्तीय मदद के जरिए समाज के पिछड़े वर्ग को गले लगाना अनिवार्य माना गया है।

दावतें और मिलन: शाम को घरों में लजीज पकवान और मिठाइयां बनती हैं। लोग एक-दूसरे के गले मिलकर गिले-शिकवे भुलाते हैं।

इको-फ्रेंडली बकरीद

बदलते दौर के साथ इस बार भारत समेत कई देशों में मुस्लिम धर्मगुरुओं ने 'इको-फ्रेंडली बकरीद' मनाने की अपील की है। सोशल मीडिया और गाइडलाइंस के जरिए लोगों से अपील की जा रही है कि:

  • कुर्बानी खुले स्थानों या रास्तों पर न देकर कवर्ड एरिया में दी जाए
  • साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाए ताकि संक्रमण न फैले

इस साल कई शहरों में 'ऑनलाइन बकरा मंडियों' और 'शेयरिंग कुर्बानी' (जिसमें लोग ऑनलाइन पैसे देकर दूरदराज के इलाकों में गरीबों के नाम पर कुर्बानी करवाते हैं) का चलन बहुत तेजी से बढ़ा है।

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Published on:
25 May 2026 06:11 pm
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