Banas River Bridge Project: शिवाड़ क्षेत्र में बनास नदी पर 101 करोड़ रुपए की लागत से पुल निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। पुल बनने से बरसात में बंद रहने वाला मार्ग खुलेगा और लाखों लोगों को राहत मिलेगी।
शिवाड़। चौथकाबरवाड़ा से शिवाड़ होते हुए जयपुर जाने वाले मार्ग पर डिडायच गांव में बनास नदी पर 101 करोड़ रुपए की लागत से पुल का निर्माण किया जाएगा। सोमवार को विधायक जितेन्द्र गोठवाल ने पुल निर्माण कार्य का शिलान्यास किया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विकास में धन की कमी नहीं आने दी जाएगी। वर्तमान में यहां छोटी रपट होने के कारण बरसात के दौरान करीब चार महीने तक यातायात बाधित रहता है। ऐसे में लोगों को टोंक होकर लगभग 70 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ता है। पुल बनने के बाद यह समस्या समाप्त होगी और शिवाड़ से जयपुर तक आवागमन सुगम हो सकेगा।
बनास नदी पर पहले भी करीब 20 करोड़ रुपए की लागत से दो रपट बनाई गई थीं, लेकिन उनकी ऊंचाई कम होने के कारण हर बारिश में पानी भरने से मार्ग बंद हो जाता था। पिछले तीन वर्षों में नदी पार करने के प्रयास में 10 लोगों की मौत हो चुकी है। चार महीने पहले यात्रियों से भरी एक बस भी नदी में फंस गई थी, जिससे क्षेत्र में भय का माहौल बन गया था।
विधायक ने बताया कि पुल निर्माण से 2 लाख से अधिक लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने पूर्व विधायक पर क्षेत्र में विकास कार्य नहीं करने और केवल वादे करने का आरोप लगाया। गोठवाल ने कहा कि खण्डार क्षेत्र को विकास के मामले में अग्रणी बनाना उनका लक्ष्य है। शिलान्यास कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, भाजपा कार्यकर्ता और ग्रामीण मौजूद रहे।
वहीं दूसरी ओर खण्डार के पूर्व विधायक अशोक बैरवा ने आरोप लगाया कि कई विकास कार्य उनकी सरकार के समय स्वीकृत हुए थे, जिनमें पुलिया निर्माण, डेकवा में 33 केवी और रवाजना चौड़ में 132 केवी जीएसएस शामिल हैं। उनका कहना है कि सरकार बदलने के कारण कार्य आगे नहीं बढ़ सके और अब वर्तमान विधायक उन्हीं योजनाओं को नया बताकर श्रेय ले रहे हैं।
बनास नदी पर डिडायच-देवली क्षेत्र में पुल निर्माण लंबे समय से अटका हुआ था। बजट स्वीकृत होने के बावजूद विभाग और ठेकेदार के बीच निर्माण सामग्री के मानकों को लेकर विवाद कोर्ट तक पहुंच गया था, जिससे परियोजना रुकी रही। अब विवाद सुलझने के बाद निर्माण कार्य शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात में मरीजों, विद्यार्थियों और कामकाजी लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है और कई बार समय पर अस्पताल पहुंचना भी संभव नहीं हो पाता।