सवाई माधोपुर

Rajasthan: रणथंभौर टाइगर रिजर्व में वनरक्षक की अचानक मौत, जंगल में ड्यूटी पर थे तैनात

रणथंभौर नेशनल पार्क में ड्यूटी के दौरान वनरक्षक सतवीर यादव की अचानक मौत से वन विभाग में शोक की लहर दौड़ गई। टोडरा नाके पर तैनात सतवीर की देर रात तबीयत बिगड़ी। प्रारंभिक तौर पर हृदय गति रुकने की बात सामने आई है, हालांकि मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी।
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Updated: 1 Sep 2026, 9:18 PM IST
Forest Guard Death
Forest Guard Death: मृतक वनरक्षक सतवीर यादव (फोटो-पत्रिका)

सवाई माधोपुर। रणथंभौर नेशनल पार्क में ड्यूटी पर तैनात वन विभाग के एक वनरक्षक की अचानक मौत से महकमे में शोक की लहर दौड़ गई। फलोदी रेंज के टोडरा नाके पर तैनात वनरक्षक सतवीर यादव का मंगलवार देर रात करीब 2 से 3 बजे के बीच निधन हो गया। प्रारंभिक जानकारी में मौत का कारण हृदय गति रुकना बताया जा रहा है। हालांकि, मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम और चिकित्सकीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

सतवीर यादव जंगल क्षेत्र में ड्यूटी कर रहे थे। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से वह तनाव में थे। इसी क्षेत्र में कुछ दिन पहले पैंथर के हमले में एक बच्चे की मौत हुई थी। इस घटना के बाद वन विभाग की टीम पर भी दबाव बढ़ा था। प्रारंभिक तौर पर यह बात सामने आ रही है कि घटना को लेकर सतवीर मानसिक तनाव से गुजर रहे थे। हालांकि, उनकी मौत को सीधे तौर पर तनाव से जोड़ने की पुष्टि नहीं हुई है।

रात में आई मौत की खबर से महकमे में शोक

टोडरा नाके पर तैनात वनरक्षक की देर रात अचानक मौत की सूचना मिलने के बाद वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी सकते में आ गए। मौके की परिस्थितियों और चिकित्सकीय जांच के आधार पर मौत के कारणों की पड़ताल की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी। रणथंभौर में वनकर्मियों की ड्यूटी सामान्य सरकारी ड्यूटी से अलग और चुनौतीपूर्ण होती है। जंगल में गश्त, वन्यजीवों की निगरानी, अवैध गतिविधियों पर नजर और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं के बीच उन्हें लगातार काम करना पड़ता है। कई बार किसी वन्यजीव हमले या संघर्ष की घटना के बाद मौके पर मौजूद कर्मचारियों पर मानसिक दबाव भी बढ़ जाता है।

25 अगस्त को सहायक वनपाल की भी हुई थी मौत

वन विभाग में हाल में हुई एक अन्य घटना ने भी कर्मचारियों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सवाल खड़े किए हैं। 25 अगस्त को सहायक वनपाल लाखन सिंह चौहान की मौत सड़क हादसे में हो गई थी। उनके डिप्रेशन से जूझने की बात भी सामने आई थी। हालांकि दोनों घटनाओं के कारण अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन लगातार चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम कर रहे वनकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चर्चा जरूर शुरू हो गई है।

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जंगल की ड्यूटी में शारीरिक के साथ मानसिक दबाव भी

रणथंभौर के वनकर्मी वन्यजीवों और जंगल की सुरक्षा के साथ-साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष की चुनौती से भी सीधे जूझते हैं। पैंथर, बाघ सहित अन्य वन्यजीवों की गतिविधियों पर निगरानी रखना और आबादी वाले क्षेत्रों में वन्यजीवों की मौजूदगी के दौरान स्थिति संभालना उनकी नियमित जिम्मेदारी का हिस्सा है। ऐसे में विशेषज्ञों और वनकर्मियों की ओर से लंबे समय से यह आवश्यकता महसूस की जा रही है कि फील्ड स्टाफ की शारीरिक सुरक्षा के साथ मानसिक स्वास्थ्य को भी विभागीय व्यवस्था में प्राथमिकता मिले। नियमित स्वास्थ्य जांच, काउंसलिंग और तनाव प्रबंधन जैसी सुविधाएं उपलब्ध होने से कर्मचारियों को कठिन परिस्थितियों से निपटने में मदद मिल सकती है।

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