शामली

शामली में किसका पलड़ा भारी? जाट-मुस्लिम वोट से तय होगा 2027 का चुनाव, BJP-RLD गठबंधन के सामने सपा की बड़ी चुनौती

UP Politics News: शामली विधानसभा सीट पर 2027 चुनाव को लेकर सियासी समीकरण बदल गए हैं। आरएलडी अब भाजपा के साथ है, जबकि सपा मुस्लिम, दलित और गैर-जाट ओबीसी मतदाताओं को साधने की कोशिश करेगी। जाट-मुस्लिम वोट इस सीट पर निर्णायक हो सकते हैं।
2 min read
Aug 21, 2026
Shamli Assembly Election
प्रसन्न कुमार चौधरी और जयन्त चौधरी (Facebook Photo)

Shamli Assembly Election 2027: पश्चिमी उत्तर प्रदेश की चर्चित विधानसभा सीट शामली में 2027 के चुनाव को लेकर सियासी तस्वीर बदलती नजर आ रही है। इस सीट पर जाट और मुस्लिम मतदाताओं का समीकरण लंबे समय से चुनावी नतीजों पर असर डालता रहा है। साल 2022 में सपा और आरएलडी साथ थे, लेकिन अब आरएलडी भाजपा के साथ गठबंधन में है। ऐसे में इस बार मुकाबले का गणित पहले से काफी अलग हो गया है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जाट मतदाताओं का समर्थन भाजपा-आरएलडी गठबंधन को मजबूत बढ़त दिलाएगा या मुस्लिम, दलित और गैर-जाट ओबीसी मतदाताओं की गोलबंदी सपा के लिए मुकाबला आसान कर सकती है।

करीब 3 लाख मतदाता, जातीय गणित अहम

शामली विधानसभा सीट पर करीब 3 लाख मतदाता हैं। इनमें लगभग 70 हजार जाट और 70 से 80 हजार मुस्लिम मतदाता बताए जाते हैं। दोनों समुदाय चुनावी नतीजों में अहम भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा करीब 45 हजार दलित, 30 से 35 हजार वैश्य, 25 हजार कश्यप, 20 हजार गुर्जर और करीब 12 हजार ब्राह्मण मतदाता हैं। यही वजह है कि प्रमुख दल इन वर्गों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश करेंगे।

2022 में सपा-RLD गठबंधन ने पलटा खेल

शामली के पिछले चुनावी इतिहास पर नजर डालें तो यहां गठबंधन का असर साफ दिखाई देता है। साल 2012 में कांग्रेस के पंकज मलिक विधायक चुने गए थे। 2017 में RLD और सपा अलग-अलग चुनाव मैदान में उतरे थे। इसका फायदा BJP को मिला और तेजेंद्र निरवाल ने जीत दर्ज की। साल 2022 में तस्वीर बदल गई। सपा और RLD ने मिलकर चुनाव लड़ा और RLD के प्रसन्न कुमार चौधरी ने करीब 7 हजार वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।

प्रसन्न चौधरी को गठबंधन पर भरोसा

मौजूदा RLD विधायक प्रसन्न चौधरी का दावा है कि BJP और RLD के साथ आने के बाद शामली में उनका मुकाबला किसी से नहीं है। उनका कहना है कि चौधरी चरण सिंह की विचारधारा के तहत वे सभी समाज के लोगों के बीच जाते हैं। उनके मुताबिक मुस्लिम, हिंदू, एससी, वैश्य, ब्राह्मण और कश्यप समेत हर वर्ग का उन्हें समर्थन मिल रहा है।

मुस्लिम वोट पर टिकी नजर

RLD के भाजपा के साथ जाने से जाट मतदाताओं का बड़ा हिस्सा NDA गठबंधन के साथ जा सकता है। लेकिन दूसरी तरफ मुस्लिम मतदाताओं के बीच प्रसन्न चौधरी को लेकर समीकरण बदलने की संभावना भी जताई जा रही है। अगर मुस्लिम वोट RLD से दूर जाता है तो BJP -RLD गठबंधन को जाटों के अलावा वैश्य, गुर्जर, कश्यप और ब्राह्मण मतदाताओं का मजबूत समर्थन हासिल करना होगा।

सपा के लिए गैर-जाट वोट अहम

दूसरी ओर समाजवादी पार्टी की नजर मुस्लिम, दलित और गैर-जाट ओबीसी मतदाताओं पर होगी। अगर सपा इन वर्गों को एकजुट करने में कामयाब रहती है तो शामली में मुकाबला फिर कांटे का हो सकता है। फिलहाल सपा की ओर से पूर्व विधायक राजेश्वर बंसल के बेटे अखिल बंसल की दावेदारी की चर्चा है। हालांकि चुनाव अभी दूर है और उम्मीदवारों के साथ-साथ गठबंधन और स्थानीय समीकरणों में भी बदलाव संभव है। ऐसे में साल 2027 में शामली का चुनाव किस करवट बैठेगा, यह जातीय समीकरण और गठबंधन की रणनीति पर काफी हद तक निर्भर करेगा।

Updated on:
21 Aug 2026 03:16 pm
Published on:
21 Aug 2026 03:16 pm