पवन ने लकड़ी कुरेदकर कई प्रकार की तस्वीरों का संकलन कर घर में आकर्षक गैलरी का स्वरूप दिया है जिसमें खिलौने, अशोक स्तंभ, महापुरूषों की तस्वीरें आदि शामिल हैं।
रायसिंहनगर (श्रीगंगानगर)। ग्रामीण अंचल में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, कमी है तो केवल उन्हें पहचानने और आगे बढ़ाने वाले मंच की। ऐसे ही अनदेखे हुनर की कहानी है क्षेत्र के गांव 71 एनपी में रहने वाले पवन छड़िया की।
कम उम्र में माता-पिता का साया उठ जाने के बाद कभी नाना तो कभी बुआ के घर रहकर जैसे-तैसे उसने दसवीं तक पढ़ाई पूरी की।
आर्थिक तंगी और पारिवारिक मजबूरियों ने आगे की पढ़ाई के रास्ते बंद कर दिए। रोजी-रोटी के लिए मजदूरी की और यहीं कहीं उसकी प्रतिभा भी हालातों के बोझ तले दबती चली गई।
विपरीत हालातों में भी उसके भीतर के कलाकार ने दम नहीं तोडा। लकड़ी पर चित्र उकेरने का शौक उसे बचपन से था।
फुर्सत के क्षणों में वह लकड़ी के टुकड़ों को आकार देता और देखते ही देखते उनमें देवी-देवताओं की मूर्तियां, मानवीय चेहरे और भावनाएं जीवंत हो उठतीं। पवन का कहना है कि मजदूरी कर जीवन चलाने के साथ-साथ कला साधना उसका सुकून है।
पवन ने लकड़ी कुरेदकर कई प्रकार की तस्वीरों का संकलन कर घर में आकर्षक गैलरी का स्वरूप दिया है जिसमें खिलौने, अशोक स्तंभ, महापुरूषों की तस्वीरें आदि शामिल हैं।
पवन सरकारी कार्यालयों में अशोक स्तंभ, न्याय सबके लिये व महापुरूषों की प्रतिमाएं निशुल्क भेंट करता रहा है ताकि कोई उसकी प्रतिभा पहचाने।
पवन का कहना है कि सरकार की ओर से हस्तशिल्प कला के प्रोत्साहन का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन कलाकारों के कम कद्रदान व उचित प्लेटफॉर्म नहीं मिलने से कला पहचान खोती जा रही है।
हस्तशिल्प के क्षेत्र में कार्य करने वाली संस्थाएं उस जैसे युवकों को उचित मंच प्रदान करने में मदद करे तो ऐसी प्रतिभाएं हुनर का लाेहा देश-विदेश तक मनवा सकती हैं।