Drug free campaign: एनसीआर क्षेत्र के हरियाणा के पलवल जिले में नशे के खिलाफ चलाया गया अभियान अब एक बड़ी सफलता बनकर उभरा है। इस पहल के तहत जिले के 200 गांव और 33 वार्ड नशा मुक्त घोषित किए गए हैं। युवाओं के नशे से दूर होने के साथ यह अभियान अब केवल सरकारी प्रयास न रहकर एक जन आंदोलन का रूप ले चुका है।
Drug free campaign: एनसीआर के तहत आने वाले हरियाणा के पलवल जिले में नशे के खिलाफ चलाया गया अभियान अब सफल नजर आ रहा है। इस अभियान की वजह से जिले के 200 गांव और 33 वार्ड को नशा मुक्त घोषित किया गया है। मिली जानकारी के अनुसार यहां के रहने वाले युवा नशे से दूर हो चुके हैं। पुलिस का कहना है कि पहले यह केवल एक अभियान था, लेकिन अब यह एक जन आंदोलन का रूप ले चुका है।
आपको बता दें कि पलवल जिले की पुलिस की तरफ से नशा खत्म करने के लिए लंबे समय से अभियान चलाए जा रहे थे। अब पुलिस की मेहनत जमीन पर दिखना शुरू हो गई है। दरअसल, पलवल जिले में पुलिस, ग्राम पंचायतों, सामाजिक संस्थाओं और युवाओं की मदद से नशा विरोधी माहौल तैयार किया गया है। इस अभियान में 197 ऐसे नशे के आदी थे, जो बिना नशा किए नहीं रह पाते थे। अभियान के दौरान उन सभी का इलाज किया गया और नशा छुड़ाने के बाद उन्हें फिर से समाज का हिस्सा बनाया गया।
वहीं, इस नशे के अभियान को लेकर पलवल के पुलिस अधीक्षक वरुण सिंगला ने बताया कि युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए उन्हें खेल और शिक्षा से जोड़ना सबसे बेहतर उपाय है। इसलिए पुलिस की तरफ से खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, जागरूकता कार्यक्रम और संवाद अभियान चलाए गए। इन सभी अभियानों की वजह से युवाओं का ध्यान नशे से हटकर खेल और पढ़ाई की तरफ गया। अभियान का असर युवाओं पर इस कदर हुआ कि उन्होंने खुद ही नशा छोड़ने की पहल शुरू कर दी।
पलवल के पुलिस अधीक्षक ने बताया कि नशा मुक्त घोषित गांवों में ग्राम पंचायतों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही है। पंचायतों ने नशे के खिलाफ अभियान को जन आंदोलन का रूप दिया और गांव स्तर पर सख्त निगरानी रखी। उन्होंने अन्य पंचायतों से अपील की कि वे इन नशा मुक्त गांवों को उदाहरण मानें और अपने गांवों को भी नशा मुक्त बनाएं। पुलिस प्रशासन पंचायतों के साथ मिलकर काम कर रहा है ताकि समाज से नशे की जड़ पूरी तरह खत्म की जा सके। अभियान के दौरान 197 नशा पीड़ितों की पहचान कर उनका इलाज किया गया। स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की मदद से उन्हें परामर्श और इलाज दिया गया। इलाज के बाद इन्हें फिर से समाज में शामिल किया गया, जिससे न केवल परिवारों को राहत मिली, बल्कि गांवों में भी यह संदेश गया कि नशे से दूर रहें।