
Ram Mandir Donation: राम मंदिर के चंदे और चढ़ावे में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग को लेकर दिल्ली में साधु-संतों ने प्रदर्शन किया। संतों ने मंडी हाउस से प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च करने की कोशिश की। पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए संतों को फिरोजशाह रोड के पास रोक दिया। इस दौरान कुछ संतों को हिरासत में लिए जाने की बात भी सामने आई।
प्रदर्शन के दौरान संतों और प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारे लगाए। 'चंदा चोर गद्दी छोड़, रामजी के लुटेरे कुर्सी छोड़' और 'जब-जब मोदी डरता है, पुलिस को आगे करता है' जैसे नारे लगाए गए। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे और दान के मामले में पारदर्शिता होनी चाहिए और अगर किसी तरह की गड़बड़ी हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपने की भी मांग की। उनका कहना था कि वे प्रधानमंत्री के सामने अपनी बात रखना चाहते हैं और मामले की जांच की मांग को सीधे सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं।
संतों के प्रधानमंत्री आवास की तरफ बढ़ने पर दिल्ली पुलिस ने उन्हें फिरोजशाह रोड के पास रोक दिया। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत के बाद स्थिति को शांत कराया गया। इसके बाद पांच प्रमुख साधु-संतों के प्रतिनिधिमंडल को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने की अनुमति दिए जाने की बात सामने आई।
प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप था कि अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ रहे संतों को रोकने के लिए पुलिस को आगे किया गया।
प्रदर्शन के बीच निर्दलीय सांसद पप्पू यादव भी साधु-संतों के समर्थन में मौके पर पहुंचे। उन्होंने संतों के साथ धरने में हिस्सा लिया और उनकी मांगों का समर्थन किया। पप्पू यादव ने कहा कि सभी साधु उनके लिए सम्मानित हैं और वे उनके साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि अगर संत किसी मुद्दे को लेकर अपनी बात सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं तो उनकी बात सुनी जानी चाहिए।
ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने भी पप्पू यादव के प्रदर्शन में शामिल होने पर उनका बचाव किया। उन्होंने सवाल किया कि अगर कोई सांसद साधु-संतों की बात सुनने और उनके समर्थन में धरने पर बैठता है तो उसने गलत क्या किया?
पप्पू यादव ने भी सोशल मीडिया पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की बातों का उल्लेख करते हुए कहा कि शंकराचार्य ने चढ़ावा चोरी के खिलाफ उनके विरोध के तरीके को शास्त्र और संविधान के अनुरूप बताया है।
उन्होंने लोगों से इस मुद्दे पर सवाल पूछने की अपील की। प्रदर्शन के दौरान सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारेबाजी होती रही। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री से सीधे सामने आकर उनका ज्ञापन लेने की मांग की।
हालांकि, राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी या अनियमितता से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। फिलहाल प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग मामले की जांच और चढ़ावे से जुड़े लेन-देन में पारदर्शिता की है।