Rajasthan News: उदयपुर की मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी (MLSU) में कुलपति प्रो. सुनीता मिश्रा के औरंगजेब को 'कुशल शासक' बताने वाले बयान के बाद विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है।
Rajasthan News: उदयपुर की मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी (MLSU) में कुलपति प्रो. सुनीता मिश्रा के औरंगजेब को 'कुशल शासक' बताने वाले बयान के बाद विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस बयान से नाराज छात्रों के विरोध और श्री राजपूत करणी सेना की चेतावनी के बाद कुलपति ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है।
हालांकि, राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने कुलपति पर माओवादी विचारधारा से प्रभावित होने का आरोप लगाते हुए उनकी बर्खास्तगी की मांग की है। इस बीच, राजभवन ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय कमेटी गठित की है।
दरअसल, 12 सितंबर को MLSU में 'विकसित भारत का रोडमैप' विषय पर आयोजित सेमिनार में कुलपति प्रो. सुनीता मिश्रा ने औरंगजेब को कुशल प्रशासक बताया था। इस बयान से छात्रों और स्थानीय संगठनों में आक्रोश फैल गया। छात्रों ने पिछले तीन दिनों से विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन किया, जिसके बाद कुलपति ने बुधवार को एक वीडियो जारी कर माफी मांगी।
वीडियो में उन्होंने कहा कि मेरे बयान से मेवाड़ की जनता और राजपूत समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंची है, इसके लिए मैं सर्वसमाज से क्षमा मांगती हूं। मेरा इरादा किसी को आहत करने का नहीं था। कुलपति ने यह भी दावा किया कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया। उन्होंने कहा कि मैं अहिन्दी भाषी हूं, जिसके कारण मेरे वक्तव्य को गलत समझा गया। यदि मेरे पूरे बयान को सुना जाए, तो स्पष्ट होगा कि मैंने औरंगजेब की प्रशंसा नहीं की।
राजस्थान सरकार के जनजाति विकास मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने कुलपति के बयान की कड़ी निंदा की। उदयपुर में नेशनल ट्राइबल फूड फेस्टिवल के दौरान उन्होंने कहा कि कुलपति खुद को इतिहास की जानकार मानती हैं, लेकिन उन्हें औरंगजेब का असली चेहरा नहीं पता। वह तलवार और कुरान के साथ धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करता था। क्या यही कुशल प्रशासन है? उन्हें मेवाड़ के राणा सांगा का इतिहास पढ़ना चाहिए, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद बेहतरीन शासन दिया।
खराड़ी ने कुलपति पर माओवादी विचारधारा से प्रभावित होने का आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसे लोग विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों में नहीं होने चाहिए। मैंने सरकार और राज्यपाल को इसकी जानकारी दी है। पहले भी एक कुलपति ने गुलाबचंद कटारिया के लिए आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, उनका क्या हाल हुआ, सब जानते हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुलपति ने आदिवासी छात्रों के साथ दुर्व्यवहार किया और उन्हें अपने पालतू कुत्तों की देखभाल के लिए मजबूर किया। सरकार को हम भी कहेंगे कि बर्खास्त करो।
श्री राजपूत करणी सेना ने भी कुलपति के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। बुधवार शाम को प्रेस कॉन्फ्रेंस में संगठन ने चेतावनी दी कि यदि कुलपति को तत्काल नहीं हटाया गया, तो वे उदयपुर बंद का आह्वान करेंगे। करणी सेना ने कुलपति के बयान को राजपूत समुदाय और मेवाड़ की भावनाओं पर हमला बताया।
विवाद के बढ़ने के बाद राजभवन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की। बुधवार को राज्यपाल के सचिव डॉ. पृथ्वी ने आदेश जारी कर उदयपुर संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय जांच कमेटी गठित की। कमेटी को जल्द से जल्द जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।