
Udaipur Congress Candidate List: उदयपुर नगर निगम चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के अंतिम दिन सोमवार को कांग्रेस में टिकट को लेकर जमकर सियासी उठापटक देखने को मिली। पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों की सूची जारी होने के बाद भी कई वार्डों में अंतिम समय तक समीकरण बदलते रहे। वार्ड 24, 34, 43 और 55 में कांग्रेस को अपने प्रत्याशी बदलने पड़े। कहीं भाई को टिकट नहीं मिलने से बहन ने नामांकन भरने से इनकार कर दिया, तो कहीं ओबीसी प्रमाण-पत्र समय पर नहीं मिलने से प्रत्याशी का नामांकन ही अटक गया। एक वार्ड में अधिकृत प्रत्याशी ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया तो दूसरे में पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी ने खुद पीछे हटकर नाराज दावेदार के लिए रास्ता खोल दिया।
नामांकन के अंतिम दिन सुबह से दोपहर तक कांग्रेस के पदाधिकारी इन वार्डों में डैमेज कंट्रोल में जुटे रहे। एक के बाद एक सामने आई परिस्थितियों के बीच पार्टी को अंतिम समय में पैनल में शामिल दूसरे दावेदारों को आगे लाकर नामांकन करवाना पड़ा।
वार्ड 43 में कांग्रेस ने राजकुमार गमेती को अपना अधिकृत प्रत्याशी बनाया था। लेकिन नामांकन के अंतिम दिन अचानक उन्होंने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया। राजकुमार नामांकन दाखिल करने के लिए पहुंचे ही नहीं। इससे कांग्रेस पदाधिकारियों के सामने अंतिम समय में प्रत्याशी बदलने की स्थिति पैदा हो गई। पार्टी ने तत्काल विकल्प तलाशते हुए शंकरलाल गमेती को पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी बनाकर उनका नामांकन दाखिल करवाया गया।
वार्ड 55 में कांग्रेस की ओर से आशा सैनी को टिकट दिया था। उनके भाई देवेंद्र माली के वार्ड 54 से टिकट की उम्मीद जताई जा रही थी। भाई को टिकट नहीं मिलने से आशा नाराज हो गईं। कांग्रेस पदाधिकारी उनके नामांकन का इंतजार करते रहे, पर वे 11.30 बजे तक वे नामांकन स्थल नहीं पहुंचीं। पार्टी नेताओं ने संपर्क करने के लिए फोन किए। आशा ने भाई को टिकट नहीं दिए जाने पर नाराजगी जताई और खुद भी कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में नामांकन नहीं भरने की बात कही। मामला बिगड़ता देख कांग्रेस ने तत्काल पैनल में शामिल दूसरे नंबर की प्रत्याशी जेसीका राव से संपर्क किया।
पार्टी ने उन्हें अधिकृत प्रत्याशी बनाया और अंतिम समय में उनका नामांकन दाखिल करवाया। इधर, टिकट नहीं मिलने से नाराज देवेंद्र माली ने भी पार्टी के निर्णय के खिलाफ जाने का फैसला किया। उन्होंने कांग्रेस से बगावत करते हुए निर्दलीय के रूप में नामांकन दाखिल कर दिया। इस तरह वार्ड-55 में कांग्रेस को एक तरफ अधिकृत प्रत्याशी बदलना पड़ा, वहीं दूसरी ओर टिकट से वंचित दावेदार ने निर्दलीय मैदान में उतरकर पार्टी के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी।
वार्ड 24 में भी कांग्रेस के सामने अंतिम समय में मुश्किल खड़ी हो गई। पार्टी ने सुन्दरलाल वसीटा को प्रत्याशी बनाया। वहीं कुमावतपुरा क्षेत्र से कांग्रेस कार्यकर्ता ललित कुमावत की पुत्री दीपिका कुमावत ने भी दावेदारी की। दीपिका को टिकट नहीं मिलने के बाद नाराजगी बढ़ गई। पार्टी ने पैनल में एक कुमावत महिला को प्रतिनिधित्व देने के तहत पूर्व पार्षद नेहा कुमावत को वार्ड-25 से टिकट दिया। इसके बाद वार्ड-24 से दीपिका का नाम आगे नहीं बढ़ पाया।
सोमवार को दीपिका नाराज होकर निर्दलीय नामांकन भरने कलक्ट्रेट पहुंच गईं। कांग्रेस पदाधिकारियों ने समझाने की कोशिश की। नेताओं ने काफी देर बातचीत कर मनाने का प्रयास किया, पर दीपिका दावेदारी पर कायम रहीं। इसी बीच वार्ड 24 में घटनाक्रम ने अचानक नया मोड़ ले लिया। अधिकृत प्रत्याशी सुन्दरलाल वसीटा ने आगे बढ़कर दीपिका के लिए रास्ता छोड़ने की सहमति दे दी। दीपिका को कांग्रेस टिकट पर चुनाव लड़ाने की बात कही। पार्टी ने वसीटा से इस संबंध में लिखित सहमति ली। इसके बाद कांग्रेस ने दीपिका को अधिकृत प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल करवाया।
वार्ड 34 में मामला थोड़ा अलग रहा। कांग्रेस ने यहां सीमा आचार्य को अपना अधिकृत प्रत्याशी बनाया था। टिकट मिलने के बाद नामांकन की तैयारी भी थी, लेकिन अंतिम समय तक उनका ओबीसी प्रमाण-पत्र उपलब्ध नहीं हो पाया। नामांकन की अंतिम तारीख और समय नजदीक आता गया, लेकिन प्रमाण पत्र की समस्या दूर नहीं हो सकी। ऐसे में पार्टी के सामने प्रत्याशी बदलने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा। कांग्रेस ने तत्काल पैनल में शामिल कल्पना सुवालका का रुख किया। अंतिम समय में उन्हें पार्टी की ओर से अधिकृत प्रत्याशी बनाया गया और उनका नामांकन दाखिल करवाया।