उदयपुर

Udaipur: आदिवासी बच्चों ने खुद पहाड़ काटकर बना दिया फुटबॉल का मैदान, नंगे पैर खेलकर बने राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी

Udaipur Football Players: उदयपुर के आदिवासी बहुल जावरमाइंस क्षेत्र में बच्चों ने खुद पहाड़ और पथरीली जमीन समतल कर फुटबॉल मैदान तैयार किया। संसाधनों की कमी के बावजूद कई बच्चे नंगे पैर खेलते हुए राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे हैं।
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Jun 22, 2026
Udaipur Tribal Football Players
जावरमाइंस एरिया के रेला गांव की फुटबाल टीम और रवा गांव में पहाड़ काटकर पथरीली जमीन पर खेलते हुए बच्चे (पत्रिका फोटो)

Udaipur Tribal Football Players: उदयपुर: जहां बड़े शहरों में खिलाड़ी आधुनिक स्टेडियम और अत्याधुनिक सुविधाओं के बीच तैयार होते हैं। वहीं, आदिवासी बहुल जावर माइंस क्षेत्र के गांवों में बच्चे पहाड़ काटकर बनाए कच्चे मैदानों पर नंगे पैर दौड़ते हुए फुटबॉल के सपने बुन रहे हैं। मैदानों की जगह पथरीली जमीन है, सुविधा की जगह संघर्ष है, संसाधनों की कमी के बीच कुछ समर्पित शारीरिक शिक्षक जेब से खर्च कर भविष्य के खिलाड़ी गढ़ रहे हैं।

फुटबॉल विश्व कप हो या भारतीय टीम के मुकाबले, क्षेत्र के बच्चों में फुटबॉल का ऐसा जुनून है कि वे खेतों, पहाड़ियों और उबड़-खाबड़ मैदानों को ही अपना स्टेडियम बना लेते हैं। रोनाल्डो, मैसी, लुइस सुवारेज, किलियन एम्बाप्पे और सुनील छेत्री इनके आदर्श हैं। यही जुनून आज जावर माइंस से 20-25 किलोमीटर के दायरे में बसे कई गांवों को फुटबॉल की नई नर्सरी बना रहा है।

पाड़ला बना प्रतिभाओं की खान

पाड़ला गांव तो मानो फुटबॉल खिलाड़ियों की फैक्ट्री बन चुका है। शीरीरिक शिक्षक फिरोज खान की ओर से तैयार यहां से अब तक 60 से 70 खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर अंडर-14 प्रतियोगिताओं में भाग ले चुके हैं। गांवों के छोटे-छोटे मैदान, खेतों और खाली जगहें ही इन खिलाड़ियों की अभ्यास स्थली है।

रवा गांव में पथरीली जमीन समतल, 5 साल से फ्री ट्रेनिंग

जावर माइंस क्षेत्र के रवा गांव में बच्चों ने सपनों के लिए खुद ही रास्ता बनाया। युवाओं और बच्चों ने पहाड़ियों के बीच पथरीली जमीन को समतल कर फुटबॉल मैदान तैयार किया। यह मैदान स्कूल से डेढ़ किमी दूर है, जहां रोज शाम बच्चों की सीटी और फुटबॉल की आवाज गूंजती है। राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय रवा के शारीरिक शिक्षक मांगीलाल मीणा पांच वर्षों से निशुल्क प्रशिक्षण दे रहे हैं।

खुद फुटबॉल खिलाड़ी और एनआईएस प्रशिक्षित मांगीलाल स्कूल की छुट्टी के बाद 20 किमी की दूरी तय कर गांव पहुंचते हैं और बच्चों को प्रशिक्षण देते हैं। शुरुआत में बच्चों के पास फुटबॉल तक नहीं थी। कई बच्चे नंगे पैर खेलते थे। तब शिक्षक ने स्वयं फुटबॉल खरीदकर दी, जूतों की व्यवस्था की और खेल सामग्री उपलब्ध करवाई। इसका परिणाम है कि 120 से अधिक बच्चे जिला स्तर और 15 खिलाड़ी राज्य स्तर पर खेल चुके हैं।

रेला गांव जहां छोटे मैदान से निकले राष्ट्रीय खिलाड़ी

जावर माइंस क्षेत्र के रेला गांव की कहानी भी किसी प्रेरणा से कम नहीं है। यहां राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में कार्यरत शारीरिक शिक्षक फिरोज खान पठान वर्षों से फुटबॉल प्रतिभाओं को तराश रहे हैं। रेला गांव पहाड़ियों के बीच बसा है और यहां खेल शारीरिक शिक्षक फिरोज खान मैदान जैसी कोई बड़ी सुविधा नहीं है।

स्कूल परिसर में छोटी और उबड़-खाबड़ जगह पर ही खिलाड़ी तैयार किए जाते हैं। इसके बावजूद यहां से 7 से 8 खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुके हैं। कामयाबी की कहानी ऐसी है कि सलूंबर जिले की अंडर-14 वर्ग की एकमात्र राष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी निरमा मीणा भी इसी क्षेत्र की देन हैं।

फिरोज खान खुद भी फुटबॉल खिलाड़ी रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए फुटबॉल, किट और अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था भी अपने स्तर पर करते हैं। क्षेत्र को खिलाड़ियों से काफी उम्मीदें हैं।

Updated on:
22 Jun 2026 10:06 am
Published on:
22 Jun 2026 10:05 am