
Keshav prasad Maurya News: उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने शनिवार को प्रयागराज के सर्किट हाउस में पत्रकारों को सम्बोधित किया। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रयागराज दौरे को लेकर कटाक्ष किया है। उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि राहुल गांधी झारखंड में चल रहे छात्रों के आंदोलन में नहीं गए क्योंकि वहां कांग्रेस की सरकार हैं और जेपीएससी, जेएसएससी परीक्षाओं में गड़बड़ियों और धांधलियां चरम सीमा पर है। प्रयागराज में राजनीतिक 'नौटंकीबाजी' करने आ गए है।
दरअसल, राहुल गांधी आज शाम केपी ग्राउंड में छात्रों संग पेपर लीक को लेकर संवाद करने वाले हैं। इसी कारण वह प्रयागराज पहुंचे हुए हैं। केशव मौर्य ने कहा कि राहुल गांधी राजनीतिक यात्रा पर प्रयागराज आए हैं और यह कार्यक्रम भी राजनीतिक ही है। उन्होंने कहा, 'राहुल गांधी अपने बाबा (फिरोज गांधी) की कब्र नहीं जाएंगे क्योंकि वहां से राजनीति नहीं चमकेगी। उन्होंने कहा कि युवाओं के हित के बजाय अपना वोट बैंक तलाशने की राजनीति कर रहे हैं, लेकिन उन्हें छात्रों का वोट न मिला था न ही भविष्य में मिलने वाला है।
केशव मौर्य ने कहा कि छात्र समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और राजनीतिक दलों के बहकावे का छात्रों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला है। छात्र निष्पक्ष हैं और अपने भविष्य को लेकर गंभीर हैं। युवाओं के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और अवसरों के क्षेत्र में केंद्र और प्रदेश सरकार लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि युवाओं और छात्रों के बीच केवल राजनीतिक एजेंडा लेकर जाने से उनका हित नहीं हो सकता।
उप-मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी और उसके पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के राजनीतिक दावे पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी का जो चरित्र रहा है, उसके सामने पीडीए की बात पूरी तरह फर्जी और राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित दिखाई देती है। सपा को यह मालूम हो चुका है कि वर्ष 2027 में उत्तर प्रदेश में तीसरी बार भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने जा रही है। इसी बौखलाहट में समाजवादी पार्टी और उसके नेता तरह-तरह का राजनीतिक नाटक कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यदि अखिलेश यादव वास्तव में पिछड़ों, दलितों और ब्राह्मणों के हितैषी थे तो वर्ष 2012 से 2017 तक जब समाजवादी पार्टी की पूर्ण बहुमत की सरकार थी और अखिलेश यादव स्वयं मुख्यमंत्री थे, तब उनका पीडीए कहां चला गया था। उस समय पिछड़े कहां थे, दलित कहां थे और ब्राह्मण कहां थे। उन्होंने कहा कि सपा सरकार के कार्यकाल में समाज के विभिन्न वर्गों के साथ अत्याचार और शोषण की घटनाएं हुईं। लोगों की जमीनों और मकानों पर कब्जे के आरोप लगे और अपराधियों, गुंडों तथा माफियाओं को राजनीतिक संरक्षण मिलने की शिकायतें सामने आती रहीं। उन्होंने कहा कि ऐसे तत्वों को लोकसभा और विधानसभा के टिकट तक दिए गए। सपा के शासनकाल का इतिहास जनता के सामने है।