Global Security Tensions: दूसरे विश्व युद्ध के इतने साल बाद जर्मनी और जापान आखिर ऐसा क्या करने वाले हैं, जिससे दुनिया में टेंशन बढ़ने लगी है… ताकतवर हथियारों के साथ मलेट्री एक्शन।
Germany-Japan Military Expansion: 87 साल पहले द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जर्मनी और जापान ने खुद को एक शांतिप्रिय, सीमित सैन्य ताकत के रूप में ढाल लिया था। लेकिन अब हालात बदलते दिख रहे हैं। दोनों देश ऐसे फैसले ले रहे हैं, जो उनकी दशकों पुरानी नीतियों से बिल्कुल अलग हैं। जापान का हथियार एक्सपोर्ट पर ढील देना हो या जर्मनी का तेजी से रक्षा बजट बढ़ाना। सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि ये देश अपनी पुरानी सीमाओं को तोड़ने लगे?
क्या ये बदलते जियोपॉलिटिकल माहौल, बढ़ते सुरक्षा खतरे और वैश्विक तनाव ने इन्हें अपनी रणनीति पर दोबारा सोचने के लिए मजबूर किया है? या फिर बात कुछ और है… जो देश कभी युद्ध की तबाही से सबक लेकर पीछे हट गए थे, वही अब एक बार फिर मजबूत सैन्य भूमिका की ओर बढ़ रहे हैं। यही वजह है कि दुनिया में टेंशन बढ़ने लगी है।
दरअसल, जापान अब अपनी पुरानी शांतिपूर्ण छवि से आगे बढ़ता दिख रहा है। प्रधानमंत्री साने ताकाइची के नेतृत्व में टोक्यो प्रोएक्टिव शांति की बात तो करता है, लेकिन असल में उसकी नीति काफी बदल चुकी है। उसका सबसे बड़ा हालिया कदम है- घातक हथियारों के एक्सपोर्ट पर लगी रोक को हटाना, जिससे साफ है कि जापान अब ग्लोबल डिफेंस मार्केट में बड़ा खिलाड़ी बनना चाहता है। वह दूसरे देशों को एक से बढ़कर एक खतरानक हथियार बेचना चाहता है, जिससे उसके इकोनॉमी में भी सुधार हो जाएगा। इसके साथ ही रक्षा बजट भी तेजी से बढ़ाया जा रहा है, जो पहले तय 1% सीमा से आगे निकल चुका है।
सिर्फ खर्च ही नहीं, सोच भी बदली है। अब जापान सिर्फ बचाव नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर जवाबी हमला करने की क्षमता भी विकसित कर रहा है। ‘ग्लोबल कॉम्बैट एयर प्रोग्राम’ जैसे प्रोजेक्ट दिखाते हैं कि जापान अब नई सैन्य ताकत के रूप में खुद को स्थापित करना चाहता है।
जर्मनी अब अपनी सेना को लेकर बड़ा बदलाव कर रहा है। जर्मनी के चांसलर ओलाफ शोल्ज के नेतृत्व में बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। जर्मनी अब संकोची ताकत नहीं रहना चाहता, बल्कि यूरोप की सुरक्षा में लीड रोल निभाने की तैयारी कर रहा है। उसका सबसे बड़ा लक्ष्य है- 2039 तक अपनी सेना को यूरोप की सबसे मजबूत पारंपरिक सेना बनाना।
इसके लिए रक्षा बजट को NATO के 2% लक्ष्य से जोड़कर कानून में शामिल किया गया है। साथ ही, अब सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि तेजी, सटीकता और नई टेक्नोलॉजी पर फोकस किया जा रहा है, ताकि आधुनिक युद्ध के हिसाब से सेना को और ताकतवर बनाया जा सके।
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