Bangladesh Drone Factory: बंगाल की खाड़ी में चीन की मौजूदगी बढ़ेगी, जिसे भारत अपने रणनीतिक क्षेत्र के रूप में देखता है। चीन पहले ही बांग्लादेश के चिटगांव में कई बड़े प्रोजेक्ट चला रहा है। अब उसे भारत के नॉर्थ-ईस्ट क्षेत्र के पास ‘ड्रोन फैक्ट्री’ प्रोजेक्ट के तहत अहम जगह मिल जाएगी।
China-Bangladesh Drone Cooperation: बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने चीन के साथ एक अहम रक्षा समझौता किया है। यह समझौता बांग्लादेश वायुसेना और चीन की सरकारी रक्षा कंपनी चाइना इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजी ग्रुप कॉरपोरेशन इंटरनेशनल के बीच हुआ है। इसके तहत चिटगांव जिले के मीरसराय में एक ड्रोन निर्माण कारखाना बनाया जाएगा। यह भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के पास है:
मीरसराय में बनने वाला ड्रोन कारखाना करीब 850 एकड़ जमीन पर बनेगा। आधिकारिक तौर पर ड्रोन के नाम नहीं बताए गए हैं, लेकिन माना जा रहा है कि यहां विंग लूंग-2 जैसे आधुनिक लड़ाकू ड्रोन बनाए जाएंगे। इन्हें अमरीका के एमक्यू-9 रीपर ड्रोन के बराबर माना जाता है। इसके अलावा आपदा प्रबंधन के लिए इस्तेमाल होने वाले नागरिक ड्रोन भी इस फैक्ट्री में बनाए जा सकते हैं।
पिछले साल बांग्लादेश ने चिटगांव और बागेरहाट में प्रस्तावित भारतीय विशेष आर्थिक क्षेत्र परियोजनाओं को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि भारत ने लंबे समय तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। 2015 में हुए समझौते के तहत मीरसराय और मोंगला में जमीन दी गई थी, लेकिन परियोजना की समयसीमा खत्म हो गई और इसके लिए मिलने वाली वित्तीय सहायता भी रद्द कर दी गई।
कारखाना चिटगांव में होगा। चिटगांव बंदरगाह बांग्लादेश का बंगाल की खाड़ी से मुख्य संपर्क द्वार है। यह भारत की सीमा से लगभग 200 किलोमीटर दूर है। इसके बनने से बांग्लादेश, भारत और पाकिस्तान के बाद दक्षिण एशिया का तीसरा ऐसा देश बन जाएगा जो ड्रोन का निर्माण करता है। खास बात यह है कि यही जगह पहले भारत के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्र यानी एसईजेड के रूप में तय की गई थी, लेकिन अब उस योजना को रद्द कर दिया गया है।
बंगाल की खाड़ी में चीन की मौजूदगी बढ़ेगी, जिसे भारत अपने रणनीतिक क्षेत्र के रूप में देखता है। चीन पहले ही चिटगांव में कई बड़े प्रोजेक्ट चला रहा है। अब उसे भारत के नॉर्थ-ईस्ट क्षेत्र के पास अहम जगह मिल जाएगी। चीन, बांग्लादेश के रंगपुर डिवीजन में स्थित द्वितीय विश्व युद्ध के समय के लालमोनिरहाट एयरबेस को फिर से सक्रिय करने में रुचि दिखा रहा है। यह इलाका भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर से 135 किलोमीटर दूर है।