
Iran Foreign Policy: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने बुधवार को यह साफ तौर पर कहा कि देश को 'न युद्ध न शांति' के लंबे समय से चला आ रहा गतिरोध अब खत्म करना होगा। ईरानी मीडिया के हवाले से यह बड़ी खबर सामने आई है। उन्होंने इस बात का भी खुलासा किया कि दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने इस मौजूदा संकट को सुलझाने के लिए बातचीत और राजनयिक संवाद का रास्ता अपनाने की मंजूरी दे दी थी। पेजेशकियन ने क्षेत्रीय संघर्षों का उदाहरण देते हुए तर्क दिया कि केवल सैन्य ताकत के बल पर किसी देश को झुकाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा, पेजेशकियन ने सिर्फ हवाई हमलों और बमबारी के दम पर किसी राष्ट्र को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करना नामुमकिन है। वे तीन साल के बाद भी एक छोटे से गाजा को नहीं झुका पाए, तो वे ईरान को क्या झुकाएंगे। ईरान कभी हार मानने वाला देश नहीं है।
तेहरान के वहदत हॉल में 'शहीद नेता' की याद में आयोजित तीसरे 'अमीन ईरान' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति पेजेशकियन ने अपनी बात रखी। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि किसी भी तरह का सैन्य टकराव ईरान के फायदे में नहीं है, लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि देश किसी भी बाहरी दबाव के सामने घुटने टेक देगा।
राष्ट्रपति ने कहा, 'हमें हर हाल में 'न युद्ध न शांति' वाली नीति को छोड़ना होगा। जंग से देश का कभी भला नहीं हो सकता, लेकिन अगर हमारी संप्रभुता और जमीन पर हमला किया जाता है, तो हम कदम पीछे नहीं खींचेंगे और न ही कभी समर्पण करेंगे।'
पेजेशकियन ने अपने कार्यकाल के दौरान दिवंगत सर्वोच्च नेता के साथ हुई अपनी नियमित बैठकों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि दिवंगत खामेनेई ने हमेशा इस बात पर जोर दिया था कि संघर्ष और कूटनीति के बीच फंसे इस गतिरोध का समाधान निकाला जाना चाहिए।
राष्ट्रपति के अनुसार, 'शहीद नेता खामेनेई बार-बार यह कहते थे कि 'न युद्ध न शांति' के इस माहौल को खत्म करना जरूरी है।'पेजेशकियन ने शासन के अंदर कूटनीति के बारे में होने वाली आंतरिक बहसों का जिक्र करते हुए बताया कि कई बार सार्वजनिक मंचों पर बातचीत के खिलाफ संदेश दिए जाते थे। इसके बावजूद उनका मानना था कि अगर सरकार इस गतिरोध को तोड़ना चाहती है, तो बातचीत का तरीका अपनाना ही होगा।
उन्होंने कहा, 'कभी-कभी आईआरआईबी पर राष्ट्रपति का यह बयान चलता था कि 'हम चर्चा नहीं करेंगे'। तब मैं उनके करीबियों से सवाल करता था कि यदि सरकार 'न युद्ध न शांति' की इस उलझन सुलझाना चाहती है, तो फिर विकल्प क्या है? अगर हम संवाद ही नहीं करेंगे, तो आगे कैसे बढ़ेंगे?' राष्ट्रपति ने बताया कि इसी सोच के आधार पर शहीद नेता खामेनेई ने बातचीत को जारी रखने की अनुमति दी थी। इस विषय पर खामेनेई का सबसे आखिरी निर्देश बहुत सीधा था, जिसमें उन्होंने कहा था -'जाओ और इस मसले को हल करो।'
ईरानी राष्ट्रपति ने देश की आंतरिक एकजुटता को बहुत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने सचेत किया कि ईरान के दुश्मन देश के अंदर फूट डालने की ताक में हैं। उनके मुताबिक, 'शत्रुओं ने अपनी सारी रणनीतियां हमारे आंतरिक सामंजस्य और एकता को तोड़ने के लिए ही बनाई और लागू की हैं।'
उन्होंने तनाव के दिनों का एक वाकया शेयर करते हुए बताया कि डोकुहे पहाड़ियों में एक बैठक को निशाना बना कर की गई बमबारी के बाद, सर्वोच्च नेता खामेनेई ने अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी और उनके सुरक्षित पहुंचने तक अपना कार्यक्रम आगे बढ़ा दिया था।
राष्ट्रपति ने कहा, '12 दिनों तक चले उस युद्ध के दौरान, जब हमारी बैठक वाली जगह पर बमबारी हुई, तो हमें उन तक पहुंचने में थोड़ी देर हो गई। लेकिन उन्होंने शाम होने तक हमारा इंतजार किया, क्योंकि वे हमारे सकुशल होने को लेकर फिक्रमंद थे।'
राष्ट्रपति पेजेशकियन ने पिछले 100 दिनों के भीतर ईरान की महिलाओं द्वारा निभाई गई भूमिका की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि महिलाओं के कदमों ने ईरान के खिलाफ साजिश रचने वाले विश्लेषकों के अनुमानों को पूरी तरह गलत साबित कर दिया है।
उन्होंने कहा, 'इन 100 दिनों में हमारी बहनों ने दुश्मनों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। उन्होंने ऐसे हालात पैदा किए हैं जिसकी कल्पना किसी राजनीतिक विश्लेषक ने भी नहीं की थी। दुश्मनों को लगा था कि वे अपने मंसूबों से हमारी क्रांति को खत्म कर देंगे, लेकिन महिलाओं की मजबूत भागीदारी ने उनके इस भ्रम को पूरी तरह तोड़ दिया।'
उन्होंने भाषण के अंत में राजनीतिक, सामाजिक और जातीय मतभेदों को भुलाकर एक साथ आने की अपील की। एकजुटता की परिभाषा देते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकता का मतलब यह है कि हम सभी को अपनी कुछ मांगों का त्याग करना होगा ताकि आपस में कोई मतभेद पैदा न हो।
पेजेशकियन देश को मौजूदा संकट से बाहर निकालने के लिए जनता से समर्थन मांगते हुए बोले, 'हम एक गौरवशाली, सम्मानित और आत्मनिर्भर ईरान का निर्माण करना चाहते हैं। आपसी तालमेल और जनता के सहयोग से ही देश को इन मुश्किलों और मौजूदा संकट से बचाया जा सकता है। जब हम मिलकर सोचेंगे और एक-दूसरे का हाथ थामेंगे, तभी देश तरक्की करेगा।' ( इनपुट : ANI)