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ईरान ने अमेरिका को दे दिया एक और ऑफर, पाक के जरिए भेजा संदेश, पर समझौते की राह अब भी मुश्किल

ईरान ने अमेरिका के साथ तनाव कम करने के लिए पाकिस्तान के जरिए नया प्रस्ताव भेजा है, लेकिन ट्रंप के सख्त रुख से समझौते की उम्मीद कम नजर आ रही है। जानिए पूरा मामला।

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May 01, 2026
फोटो में प्रेसिडेंट ट्रंप और ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामनेई ( ANI)

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने एक बार फिर अमेरिका के साथ बातचीत आगे बढ़ाने की कोशिश की है। हालांकि, हालात ऐसे हैं कि इस नई पहल के सफल होने की संभावना फिलहाल कम नजर आ रही है।

अमेरिका की ओर से सख्त रुख के संकेत मिल चुके हैं, जिससे यह साफ है कि दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी अब भी बड़ी बाधा बनी हुई है।

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पाकिस्तान बना मध्यस्थ

ईरान ने अपनी ताजा योजना पाकिस्तान के जरिए अमेरिका तक पहुंचाई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह प्रस्ताव गुरुवार शाम पाकिस्तान को सौंपा गया।

पाकिस्तान इस पूरे मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और उसने पहले भी दोनों देशों के बीच बातचीत कराने की कोशिश की थी।

इस प्रस्ताव में ईरान ने हॉर्मुज स्ट्रेट में समुद्री आवाजाही बहाल करने की बात कही है। यह इलाका वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है।

अमेरिका की नाराजगी, प्रस्ताव खारिज होने के आसार

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं दिख रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने अपने सलाहकारों के साथ बैठक में इस योजना पर गंभीर आपत्ति जताई है।

अमेरिका का कहना है कि समुद्री रास्ता खोलने के बावजूद, अगर ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता, तो इससे अमेरिका का दबाव कमजोर पड़ जाएगा। खासतौर पर ईरान के पास मौजूद उच्च स्तर के यूरेनियम को लेकर अमेरिका चिंतित है।

तेल कीमतों का दबाव भी बड़ी चिंता

हालांकि अमेरिका के सामने एक और चुनौती भी है। अगर होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें ऊंची बनी रहेंगी।

इसका सीधा असर अमेरिका में ईंधन की कीमतों पर पड़ रहा है, जिससे आम जनता पर बोझ बढ़ रहा है। यानी अमेरिका के सामने दोहरी स्थिति है, एक तरफ सुरक्षा और रणनीति का सवाल, दूसरी तरफ आर्थिक दबाव।

इस्लामाबाद में वार्ता फिर विफल

पिछले सप्ताह इस्लामाबाद में होने वाली अहम बैठक भी बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई। ईरानी प्रतिनिधिमंडल अचानक बैठक छोड़कर वापस लौट गया।

इससे पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों को झटका लगा है। ईरान के विदेश मंत्री के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तान को अपनी मांगों की सूची सौंपी थी, जिसमें अमेरिका और इजराइल से जुड़े मुद्दे शामिल थे।

पहले दौर की बातचीत भी रही बेनतीजा

इससे पहले भी इस्लामाबाद में हुई पहली बैठक करीब 21 घंटे तक चली थी, लेकिन उसमें भी कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया। दोनों पक्षों के बीच मतभेद इतने गहरे हैं कि बातचीत बार-बार रुक जाती है।

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