
नासा (NASA) इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर ताज़ी सब्जियाँ उगाने के सफल प्रयोग कर चुका है, लेकिन अब वैज्ञानिकों का मानना है कि यही पौधे भविष्य में ज़रूरत पडऩे पर दवाओं का काम भी करेंगे। नई रिसर्च के अनुसार तंबाकू के एक करीबी पौधे और हानिरहित पौधों के वायरस की मदद से अंतरिक्ष में 'जीवित दवा फैक्ट्री' तैयार की जा सकती है। इससे चंद्रमा और मंगल जैसे लंबे अंतरिक्ष अभियानों में अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी से दवाएं ले जाने की बजाय ज़रूरत के समय वहीं दवाएं बना सकेंगे।
नासा इस तकनीक पर काम कर रहा है। हालांकि बताया जा रहा है कि यह तकनीक अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन आत्मनिर्भर अंतरिक्ष मिशनों की दिशा में यह बड़ा कदम हैं जो भविष्य में काफी उपयोगी हो सकता है।
इस रिसर्च में वैज्ञानिकों ने निकोटियाना बेंथमियाना नाम के पौधे का इस्तेमाल किया है। यह तंबाकू का करीबी रिश्तेदार है, लेकिन सिगरेट बनाने वाले तंबाकू से अलग है। यह पौधा तेज़ी से बढ़ता है और इसमें आनुवंशिक बदलाव करना आसान होता है। पृथ्वी पर इसका इस्तेमाल पहले भी प्रायोगिक वैक्सीन, एंटीबॉडी और अन्य चिकित्सीय प्रोटीन बनाने में किया जा चुका है।
वैज्ञानिकों की इस रिसर्च का दूसरा अहम हिस्सा काउपी मोजेक वायरस है। यह वायरस कुछ पौधों को संक्रमित करता है, लेकिन इंसानों को संक्रमित नहीं करता और पूरी तरह हानिरहित माना जाता है। ऐसे में अंतरिक्ष में दवा बनाने के लिए इसके इस्तेमाल से भी अच्छे परिणाम मिलने की संभावना जताई जा रही है।
पहले पौधे की पत्तियाँ तोडकऱ उन्हें पीसना और रासायनिक प्रक्रिया से गुज़रना पड़ता था जिसके बाद दवा बनती थी। नासा जिस तकनीक पर काम कर रहा है, उस तकनीक में वैक्यूम की मदद से पौधे के अंदर विशेष घोल पहुंचाया जाता है और फिर सेंट्रीफ्यूज और उसके साथ फिल्ट्रेशन की सहायता से ज़रूरी कण निकाल लिए जाते हैं। इनके मिश्रण से दवा बनाने के प्लान पर नासा काम कर रहा है। दुनियाभर के वैज्ञानिक नई खोजों की तलाश में लगे रहते हैं और अंतरिक्ष में पौधों से दवा बनाना एक बड़ी खोज साबित हो सकती है।