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Escape Video: वेनेजुएला से जान बचाकर कैसे भागी थीं मचाडो? नोबेल विजेता ने खोले रोंगटे खड़े कर देने वाले राज

Maria Machado Escape Story: मारिया मचाडो ने समुद्र के रास्ते वेनेजुएला से भागने का दर्दनाक अनुभव साझा किया है। उन्होंने कहा कि मादुरो सरकार के बढ़ते दबाव के बीच इस खतरनाक यात्रा के दौरान उन्हें अपनी जान का डर था।

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Jan 17, 2026
मचाडो ने वेनेजुएला से समुद्री रास्ते से भागने की डरावनी कहानी सुनाई। (Photo-IANS)

Machado Nobel Prize: वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो ने अपनी अमेरिकी यात्रा के दौरान एक दिल दहला देने वाला किस्सा शेयर किया। मचाडो ने अपने देश वेनेजुएला से भागने के दर्दनाक किस्से को साझा करते हुए कहा कि यह घटना बहुत ही खतरनाक और भयावह थी। उन्होंने कठिनाइयों का जिक्र करते हुए कहा कि जब वह समुद्र के रास्ते वेनेजुएला से भाग रही थीं, तो यात्रा के दौरान उन्हें चोट भी लगी, साथ ही लहरों के प्रभाव से नाव भी नियंत्रण से बाहर होने लगी थी।

मचाडो ने कहा कि समुद्री लहरें छह फीट से भी ज्यादा ऊपर उठ रही थीं। साथ ही, जरूरी नेविगेशन सिस्टम भी फेल हो गया था। उन्होंने कहा कि हम यात्रा के दौरान रास्ता भटक गए थे। हमारा GPS सिस्टम भी काम नहीं कर रहा था और सैटेलाइट फोन ने भी काम करना बंद कर दिया था। उन्होंने कहा कि यह सब हमारे साथ अचानक हो रहा था और हमें कुछ समझ नहीं आ रहा था कि आगे क्या करना है? यह स्थिति बहुत खतरनाक और डरावनी थी और यह कई घंटों तक चली।

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मचाडो को रहना पड़ा था छिपकर

मारिया कोरिना मचाडो वेनेजुएला की प्रमुख विपक्षी नेता हैं। उन्हें 2025 में लोकतंत्र और मानवीय अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष करने के लिए नोबेल शांति पुरस्कार मिला था। हालांकि, मचाडो ने अपना नोबेल पुरस्कार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सौंप दिया है और उन्हें इस पुरस्कार का असली हकदार बताया है।

मचाडो, वेनेजुएला में लगातार संघर्ष कर रही हैं और लंबे समय से पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की सत्ता को चुनौती दे रही थीं। मादुरो के खिलाफ खड़े होने के कारण मचाडो को धमकियां मिलने लगीं और मादुरो की सरकार ने उनके खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी कर दिया था। इसके बाद, मचाडो को प्रताड़ना और गिरफ्तारी के डर से लगभग एक साल तक छिपकर रहना पड़ा था।

मचाडो कैसे कामयाब हुई देश छोड़ने में?

अपनी राजनीतिक गतिविधियों और सरकार विरोधी कामों के लिए मादुरो की सरकार ने मचाडो के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी कर दिया था। इस कारण उन्हें छिपकर रहना पड़ता था और कई बार पहचान छुपाकर और भेष बदलकर रहना पड़ता था।

हालांकि मचाडो के कामों के लिए नोबेल पुरस्कार कमेटी ने उनके नाम की घोषणा की, तो उनके लिए वेनेजुएला से बाहर निकलना आसान नहीं था। यह सफर बहुत ही खतरनाक और जोखिम भरा होने वाला था। मचाडो ने देश छोड़ने के लिए अपना भेष बदला और पहचान छुपाई। उन्होंने सरकारी एजेंटों से बचने के लिए विग और अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया। इस दौरान उन्होंने अपने साथियों के साथ लगभग 10 सैन्य चेकपॉइंट्स को पार किया और सभी बाधाओं को पार करते हुए समुद्र तट तक पहुंचीं। इसके बाद उन्होंने एक स्थानीय मछली पकड़ने वाली नाव में बैठकर कैरेबियन सागर पार किया। सफर की कठिनाईयों के बाद, मचाडो वेनेजुएला के पास स्थित कुराकाओ द्वीप तक पहुंचीं और वहां से प्लेन की मदद से नार्वे के लिए रवाना हुई।

अमेरिका पर जताया भरोसा

मचाडो ने अमेरिका के समर्थन पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका की सरकार, वहां के लोग और राष्ट्रपति ट्रंप वेनेजुएला का समर्थन करेंगे और उसके हित में काम और फैसले लेंगे। साथ ही, वे वेनेजुएला में लोकतंत्र, न्याय और आजादी को बहाल करने की ओर काम करेंगे। उन्होंने वेनेजुएला में मादुरो की गिरफ्तारी के बाद हुए बदलाव को अमेरिकी सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा कि 3 जनवरी के बाद आज अमेरिका एक ज्यादा सुरक्षित देश है।

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Published on:
17 Jan 2026 07:06 pm
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