Britain की खुफिया एजेंसी GCHQ ने दावा किया है कि यूक्रेन युद्ध में अब तक करीब 5 लाख रूसी सैनिक मारे जा चुके हैं, जिससे पुतिन पर दबाव बढ़ता दिख रहा है।
Russia Ukraine War: रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी GCHQ की एक रिपोर्ट ने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है। एजेंसी की चीफ एन कीस्ट-बटलर ने दावा किया है कि साल 2022 से शुरू हुई जंग में अब तक करीब 5 लाख रूसी सैनिक मारे जा चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि 'युद्ध में रूस को उम्मीद से कहीं ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है।' वहीं, ब्रिटेन ने रूस पर जासूसी, साइबर हमलों और दुनिया के खिलाफ ‘हाइब्रिड वॉर’ छेड़ने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय तनाव और बढ़ गया है।
ब्रिटेन ने चेतावनी दी है कि रूस सिर्फ सीमा पर ही नहीं लड़ रहा, बल्कि उसने 'पूरी दुनिया के खिलाफ एक 'हाइब्रिड वॉर' छेड़ रखी है।' खुफिया चीफ ने सीधे तौर पर क्रेमलिन (रूसी सरकार) पर जासूसी करने, तोड़फोड़ की साजिश रचने और साइबर हमले करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। रूसी सरकार लगातार इन आरोपों को खारिज कर रही है।
बटलर ने कहा कि 'इस आक्रामकता और अराजकता के सामने हमारी एजेंसी रूसी खतरे को कम करने के लिए दिन-रात काम कर रही है।' उन्होंने आगे कहा कि 'जब हम यूक्रेन के समर्थन में मजबूती से खड़े हैं, तब पुतिन युद्ध के मैदान में लगातार पीछे की तरफ जा रहे हैं।'
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर दोनों देश अपनी सेना के नुकसान को छुपा क्यों रहे हैं? सच यह है कि रूस और यूक्रेन दोनों ही एक-दूसरे के नुकसान के बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन अपने सैनिकों की मौत का सही आंकड़ा कभी सामने नहीं लाते। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने इस साल की शुरुआत में दावा किया था कि जंग की शुरुआत से अब तक उनके 55,000 सैनिक मारे गए हैं। दूसरी ओर, मीडिया आउटलेट 'मीडियाजोना' और स्वयंसेवकों की एक टीम मिलकर रूसी मौतों का डेटा जुटा रही है। सरकारी रिकॉर्ड, सोशल मीडिया पोस्ट और कब्रिस्तानों और रिकॉर्ड की जांच में अब तक 2,23,539 रूसी सैनिकों और अधिकारियों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।
ब्रिटेन और रूस के बीच यह दुश्मनी नई नहीं है। ब्रिटेन पहले भी रूस पर मर्डर और हमलों के आरोप लगा चुका है। साल 2006 में पूर्व केजीबी अधिकारी अलेक्जेंडर लिट्विनेंको की लंदन में रेडियोएक्टिव पोलोनियम जहर देकर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद साल 2018 में सैलिसबरी में पूर्व रूसी खुफिया अधिकारी सर्गेई स्क्रिपल पर खतरनाक नर्व एजेंट 'नोविचोक' से जानलेवा हमला हुआ था। इन दोनों ही घटनाओं की उंगलियां सीधे क्रेमलिन की तरफ उठी थीं।
इसी बीच, खुफिया चीफ एन कीस्ट-बटलर ने सिर्फ रूस ही नहीं, बल्कि चीन को लेकर भी बेहद डरावनी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि चीन एक बड़ी वैज्ञानिक और तकनीकी महाशक्ति के रूप में उभर रहा है, जिसके पास एडवांस साइबर क्षमताएं हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का जिक्र करते हुए उन्होंने आगाह किया कि ब्रिटेन और उसके सहयोगियों के पास अपनी तकनीकी बढ़त बनाए रखने के लिए समय बहुत कम बचा है। बटलर ने कहा कि 'हमारे पैरों के नीचे की जमीन बहुत तेजी से खिसक रही है और अगर दुनिया अब भी नहीं संभली, तो आने वाला वक्त बेहद खतरनाक होने वाला है।