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शेख हसीना का प्रत्यर्पण होगा या नहीं? जानें क्या हैं भारत-बांग्लादेश संधि के नियम

बांग्लादेश में बीएनपी की भारी जीत के बाद पार्टी ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग फिर तेज कर दी है। सलाहुद्दीन अहमद ने कहा कि नई सरकार कानूनी तरीके से भारत से हसीना को वापस मंगवाएगी। हालांकि, 2013 की प्रत्यर्पण संधि (2016 में संशोधित) में कई अपवाद हैं, जिसके आधार पर भारत इनकार कर सकता है।

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Feb 13, 2026
Sheikh Hasina
Sheikh Hasina (Photo - ANI)

Sheikh Hasina Extradition Demand: बांग्लादेश में 13वें आम चुनाव में बीएनपी की दो-तिहाई बहुमत वाली जीत के बाद राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। पार्टी के स्थायी समिति सदस्य सलाहुद्दीन अहमद ने 13 फरवरी 2026 को कहा कि बीएनपी औपचारिक रूप से भारत से शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग करेगी। उन्होंने कहा, 'विदेश मंत्रालय पहले से ही मामला उठा चुका है, हम इसका समर्थन करते हैं। हम कानून के अनुसार उनके प्रत्यर्पण के लिए दबाव बनाएंगे। यह दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों का मुद्दा है। हम भारत सरकार से अपील करते हैं कि उन्हें मुकदमा का सामना करने के लिए वापस भेजा जाए।' अहमद ने जोर दिया कि बीएनपी भारत सहित सभी पड़ोसियों के साथ आपसी सम्मान और समानता पर आधारित संबंध चाहती है।

शेख हसीना पर आरोप

शेख हसीना अगस्त 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले विद्रोह के बाद भारत में निर्वासन में हैं, जिसने उनके 15 साल के शासन का अंत किया। नवंबर 2025 में इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने उन्हें अनुपस्थिति में 'मानवता के खिलाफ अपराधों' के लिए मौत की सजा सुनाई, जिसमें 2024 के प्रदर्शनों में हिंसक दमन (UN के अनुसार 1,400 मौतें) शामिल है। उन पर भड़काऊ टिप्पणियां, हेलीकॉप्टर/ड्रोन/घातक हथियारों के इस्तेमाल के आदेश जैसे आरोप हैं। वे कई अन्य मामलों में भी दोषी ठहराई गई हैं।

2013 में हुई थी भारत-बांग्लादेश प्रत्यर्पण संधि

भारत-बांग्लादेश प्रत्यर्पण संधि 28 जनवरी 2013 को हुई थी, मुख्य रूप से सीमा पर आतंकवाद और उग्रवाद से निपटने के लिए। जुलाई 2016 में संशोधन (अनुच्छेद 10(3)) से प्रक्रिया आसान हुई-साक्ष्य की जरूरत कम हुई, गिरफ्तारी वारंट पर्याप्त। संधि में 'दोहरी आपराधिकता' (dual criminality) का सिद्धांत है-अपराध दोनों देशों में गैरकानूनी होना चाहिए। मौत की सजा वाले मामलों में लिखित गारंटी लेनी पड़ती है कि फांसी नहीं दी जाएगी।

प्रत्यर्पण से इनकार के प्रमुख आधार:

अनुच्छेद 6 (राजनीतिक अपराध अपवाद): यदि अपराध 'राजनीतिक प्रकृति' का है, तो प्रत्यर्पण से इनकार हो सकता है। हालांकि हत्या आदि को राजनीतिक नहीं माना जाता, लेकिन हसीना के मामले में आरोपों को राजनीतिक बदले की भावना से जोड़ा जा सकता है।
अनुच्छेद 8: यदि आरोपी साबित कर दे कि अनुरोध 'अन्यायपूर्ण या दमनकारी' है, या 'सद्भावना से नहीं' किया गया, या न्याय के हित में नहीं, तो इनकार संभव। हसीना का ट्रायल अनुचित/असंवैधानिक बताकर भारत इनकार कर सकता है।
अन्य आधार: मानवीय चिंताएं, मौत की सजा, या यदि आरोप भारत के कानून में फिट नहीं बैठते।

जानें विदेश मंत्रालय ने क्या कहा

भारत ने पहले के अनुरोधों (2024-2025) को 'जांच के अधीन' बताया है। MEA प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने नवंबर 2025 में कहा था कि अनुरोध जांचा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत हसीना (पुरानी सहयोगी) को नहीं सौंपेगा, क्योंकि यह 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति और क्षेत्रीय स्थिरता के खिलाफ होगा। बीएनपी की नई सरकार से संबंध मजबूत रखने के लिए संतुलित रुख अपनाया जा सकता है।

अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ। आने वाले दिनों में कूटनीतिक बातचीत से स्थिति स्पष्ट होगी, लेकिन संधि के अपवादों से प्रत्यर्पण की संभावना कम है। यह भारत-बांग्लादेश संबंधों की नई परीक्षा बनेगा।

Published on:
13 Feb 2026 11:00 pm