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आखिर किन्नर एक रात के लिए ही क्यों और किससे करते हैं शादी, जानकर हैरान रह जाएंगे आप

आखिर किन्नर एक रात के लिए ही क्यों और किससे करते हैं शादी, जानकर हैरान रह जाएंगे आप

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kinner ki shadi

आखिर किन्नर एक रात के लिए ही क्यों और किससे करते हैं शादी, जानकर हैरान रह जाएंगे आप

अनुपपुरः किन्‍नर भी आपकी और हमारी तरह इंसान होते हैं, लेकिन भारतीय समाज में उन्हें एक अलग नज़रिये से देखा जाता है। इसलिए वह अपनी ही एक अलग दुनिया बनाकर उसमें रहते हैं। इसी के चलते उनका जीवन आम लोगों की तरह नही रह पाता। लेकिन, फिर भी वह अपनी बनाई दुनियां में रहकर खुश रहते हैं। पुरानी मान्यता है कि, किन्नर अगर बदकिस्मत को भी दुआ दे दे तो उसकी जिंदगी संवर जाती है।वैसे तो यह लोग आमतौर पर अपना सीमित दायरा बनाकर सब एक जुट होकर रहते हैं। इसलिए आमतौर पर समाज के लोगों से इनका मेल मिलाप भी कम ही हो पाता है। लेकिन, इनकी ज़िदगी में कई ऐसे रौचक तथ्य हैं, जिनको जानकर आपको हैरानी होगी। आमतौर पर लोग इन बातों से अब तक अनजान हैं। किन्नरों के बारे में यह मान्यता है कि, उनकी शादी नहीं होती, लेकिन यह मान्यता गलत है, उनकी शादी होती है, लेकिन सिर्फ एक रात के लिए। इसके बाद वह विधवा हो जाते हैं।

एक दूसरे के बांटते हैं ग़म

किन्नरों की सबसे बड़ी ताकत होती है उनकी एक जुटता। वह एक साथ रहकर एक दूसरे के अच्छे और बुरे समय को बांटते हैं। एक दूसरे की खुशियों के हिस्सेदार रहते हैं। समाज में आने वाले हर नए किन्नरों का स्वागत बहुत ही जोरदार तरीके से किया जाता है। क्योंकि, आमतौर पर यह काफी समपन्न भी होते हैं, तो एक दूसरे की छोटी-छोटी खुशियों को बड़े पैमाने पर सेलिब्रेट करते हैं। नए किन्नर के स्वागत में एक भव्य आयोजन किया जाता है, जिसमें नाच-गाना और खाना पीना होता है। इस आयोजन को सम्मेलन भी कहा जाता है। खैर, हम बात कर रहे थे किन्नरों की शादी के बारे में, तो किन्नर न केवल शादी करते हैं वह सोलह श्रृंगार भी करते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि, किन्नर सिर्फ एक दिन के लिए विवाह करते हैं, वह भी भगवान से।

करते है भगवान से विवाह

जी हां, किन्नर सिर्फ एक दिन के लिए भगवान से विवाह करते हैं और दूसरे दिन ही विधवा हो जाते हैं। वह अपने भगवान अर्जुन और नाग कन्या उलूपी की संतान इरावन जिन्हें अरावन के नाम से भी जाना जाता है से शादी करते हैं। पको जानकर बृहैरानी होगी कि, विवाह के दौरान किन्नर खूब जश्न मनाते हैं, इस दौरान वह अपने देवता इरावन को शहर भृमण पर ले जाते हैं, जहां रास्तेभर वह जश्न मनाते हुए चलते हैं। लेकिन, भृमण से लौटते समय वह इरावन देवता की मूर्ति को तोड़ देते हैं। मूर्ति के तूटते ही यह मान्यता है कि, जिस किन्नर से इरावन देवता का विवाह होता है वह विधवा हो जाते है। फिर शुरु होता है विलाप। फिर उस किन्नर पर से सभी श्रंगार वाली चीजों को उतारा जाता है, उसे हिन्दू रीति रिवाज के अनुसार विधवा के वस्त्र पहनाए जाते हैं। हालांकि, इसके बाद वह किन्नर एक आम जीवन जीने लगता है।

महाभारत युद्ध से जुड़ी है विवाह की मान्यता

किन्नर विवाह की इस रीत की शुरुआत महाभारत से शुरु हुई है। माना जाता है कि, महाभारत युद्ध से पहले पांडवों ने मां काली की पूजा की थी। इस पूजा के दौरान उनपर किसी राजकुमार की बलि चढ़ाने की शर्त रखी गई। इस दौरान पांडवों ने कई प्रयास किये लेकिन कोई भी राजकुमार बलि देने के लिए कोई तैयार नहीं हुआ। लेकिन, इरावन इस बलि के लिए तैयार हो गया, पर उसकी एक शर्त थी कि वह बलि से पहले विवाह करना चाहेगा, यानी बिना विवाह किए वह बलि नहीं देगा। उसके इस शर्त के आगे पांडवों के सामने बड़ी समस्या आन खड़ी हुई थी। क्योंकि, सबसे बड़ा सवाल तो यह था कि, एक दिन के लिए इरावन से शादी करेगा कौन।

इस समस्‍या का निवारण करने के लिए खुद श्री कृष्ण को धर्ति पर आना पड़ा। उन्‍होंने इरावन की आखरी इच्छा पूरी करने के लिए पुन: मोहिनी रूप धारण किया और इरावन के साथ परिणय सूत्र में बंध गए। मगर शर्त के मुताबिक, इरावन की बलि चढ़नी थी। शादी के अगले ही दिन मोहिनी रूपी श्री कृष्ण विधवा हो गए तो उन्होंने विलाप किया और विधवा रूप में सभी रीति-रिवाजों का पालन भी किया। इसी घटना को याद करते हुए किन्‍नर इरावन को अपना भगवान मानते हैं और उनसे एक दिन के लिए शादी करने के बाद अगले दिन विधवा हो जाते हैं।