मिलिए आत्मनिर्भर एमबीए पास किसान से, किसानी से कमा रहा तीन गुना लाभ

आत्मनिर्भर भारत

  • बंगलुरु से एमबीए करने के बाद गांव आकर किसानी कर रहा युवक
  • पिता-चाचा की खेती में हाथ बंटा रहा, जैविक खेती कर सेहतमंद समाज भी गढ़ रहा

अशोकनगर। पीएम मोदी ने लाॅकडाउन के दौरान आत्मनिर्भर बनने पर जोर दिया था। बंगलुरु से बिजनेस मैनेजमेंट की मास्टर्स डिग्री लेने वाला एक युवक आत्मनिर्भर भारत को गढ़ने में मशगूल है। एमबीए की डिग्री लेने के बाद उच्चशिक्षित युवा किसान आर्गेनिक खेती में तीनगुना से अधिक लाभ कमा रहा। अब आसपास के किसान इस युवक से खेती के नए गुर भी सीख रहे।

Read this also: मालिक न करें फिर आना पड़े...दो पैसा कम कमाएंगे लेकिन लौटेंगे नहीं

अशोकनगर शहर में रहने वाले रजत जैन ने बंगलुरु से एमबीए की पढ़ाई पूरी की है। एमबीए करने के बाद उन्होंने किसी की नौकरी करने की बजाय आत्मनिर्भर युवा बनने की सोची। ऐसे में उनको खेती से बेहतर कोई उपाय नहीं सूझी। शहर से करीब आठ किलोमीटर दूर दियाधरी गांव में रजत के परिवार की करीब तीस बीघा खेती की जमीन है। रजत के अनुसार इन खेतों में दस बीघे में गन्ना लगा था, बाकी जमीन में गेहूं, चना आदि बोया गया था।

Read this also: बहनों ने दी भाई केे अर्थी को कंधा, छोटी बहन ने दी मुखाग्नि

एमबीए पास इस युवा ने जब घरवालों को किसानी का निर्णय सुनाया तो पहले तो घरवालों को यह फैसला कुछ सुहाया नहीं लेकिन बाद में सब सराहने लगे। रजत ने खेतों में फसल पकने के बाद करीब आठ बीधा में तरबूज उगाने का निर्णय लिया और दस बीघा में अमेरिकन मक्का लगाया।
रजत बताते हैं कि इस खेती में उन्होंने रसायनिक खाद का उपयोग न करते हुए केवल आर्गेनिक सामानों का उपयोग किया। रजत बताते हैं कि जब फसल हुई तो करीब एक लाख रुपये के तरबूज बेचे और एक लाख के आसपास का ही मक्का उन्होंने बेचा। वह बताते हैं कि तरबूज या मक्का बोने में बीज, खाद, बुवाई-सिंचाई आदि में करीब तीस-तीस हजार रुपये का खर्च आया था। तीन गुना फायदा होने पर परंपरागत खेती करने वाले घर के लोग भी खुश हुए।

Read this also: युवती को ब्याह रचा घर लाया दो दिन बाद निकली पाॅजिटिव, 32 लोग क्वारंटीन

रजत के चाचा सुभाषचंद्र जैन ने बताया कि बंगलुरु से एमबीए कर चुके भतीजा की देखरेख में गेहूं, चना की फसल कटने के बाद तरबूज, अमेरिकन मक्का व ककड़ी, टमाटर मिर्च आदि बोया। इसमें जैविक खाद डालकर निरंतर पर्यवेक्षण में फसल तैयार की है। इसका अब लाभ भी मिल रहा है।
रजत बताते हैं कि वह ड्रिप विधि से सिंचाई करते हैं। इससे पानी की खपत कम होती है और सिंचाई भी बेहतर हो जाती है।

Read this also: पति-पत्नी निकले कोरोना पाॅजिटिव, कोरोना का नया हाॅटस्पाॅट बन रहा यह जिला

धीरेन्द्र विक्रमादित्य
और पढ़े

MP/CG लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned