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MP Election 2023: यादों के झरोखे से…1952-1957 चुनावों में चुने गए थे दो विधायक

मध्यभारत में थी पछार सीट 62 में बनी अशोकनगर...

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विधानसभा चुनावों की शुरुआत हुई तो क्षेत्र उन विशेष विधानसभाओं में शामिल रहा, जहां एक सीट पर दो विधायक चुने जाते थे। जहां राजनीतिक दलों ने एक सीट पर अपने दो-दो प्रत्याशी उतारे और यहां से दो विधायक चुने गए। बात कर रहे हैं अशोकनगर विधानसभा की। जहां वर्ष 1952 व वर्ष 1957 के विधानसभा चुनाव में एक सीट से दो-दो विधायक चुने गए। वर्ष मध्यभारत प्रांत रहते 1952 में हुए चुनाव में इसका नाम पछार विधानसभा था, जिसमें 86,962 मतदाता थे और 51,547 मतदाताओं ने वोट डाले यानी 59.28 फीसदी मतदान हुआ। नौ प्रत्याशी इस चुनाव मैदान में थे। जहां कांग्रेस, हिंदू महासभा, सोशलिस्ट पार्टी ने दो-दो प्रत्याशी चुनाव घोषित कर चुनाव लड़ा, तो वहीं भारतभूमि सेवक संघ ग्वालियर का एक व दो निर्दलीय प्रत्याशी भी चुनाव लड़े। पछार विस में कांग्रेस के रामदयाल सिंह रघुवंशी 12,830 व कांग्रेस के दुलीचंद को 11,499 वोट मिले। दोनों ही विधायक चुने गए।

दोनों प्रत्याशी कांग्रेस के चुने गए थे
मप्र का गठन होने के बाद पछार विधानसभा का नाम बदलकर अशोकनगर विधानसभा क्षेत्र हो गया। जहां वर्ष 1957 में हुए चुनाव में कांग्रेस, हिंदू महासभा व सीपीआई ने दो-दो प्रत्याशी घोषित किए व एक निर्दलीय प्रत्याशी रहा। सात प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा और 1,07,140 मतदाताओं में से 71,337 ने वोट डाले यानी 66.58 फीसदी मतदान हुआ। जिसमें कांग्रेस के दुलीचंद को 18,852 व कांग्रेस के रामदयाल सिंह को 18,563 वोट मिले, इससे फिर से कांग्रेस के दोनों प्रत्याशी विधायक चुने गए।

3 बार विधायक बनने का रिकॉर्ड
पहले अशोकनगर विधानसभा में पहले गुना का भी कुछ क्षेत्र आता था, मतदाता ज्यादा होने से इस विधानसभा में दो विधायक चुने जाते थे। लेकिन 1962 में क्षेत्र घटने से अशोकनगर में मतदाता संख्या घट गई। इससे 1962 में एक विधायक चुना गया। तीसरी बार भी अशोकनगर में रामदयाल सिंह विधायक चुने गए और दुलीचंद राघौगढ़ से विधायक बने। इससे इन दोनों के नाम लगातार तीन बार विधायक बनने का रेकॉर्ड है। हालांकि इसके बाद अब अशोकनगर में लगातार कोई भी तीसरी बार विधायक नहीं चुना गया।

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