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रोहिंग्‍या पर रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों के खिलाफ म्‍यांमार कोर्ट ने मुकदमा बंद करने से किया इनकार

म्यांमार की अदालत ने रॉयटर्स के दो पत्रकारों को रखाइन प्रांत में नियमों का उल्लंघन कर रिपोर्टिंग करने के मामले में रिहा करने से इनकार कर दिया है।

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नई दिल्ली । म्यांमार की अदालत ने बुधवार को समाचार एजेंसी रॉयटर्स के दो पत्रकारों के खिलाफ दर्ज मामले को खारिज करने से इनकार कर दिया है। हालांकि पिछले हफ्ते दोनों पत्रकारों के वकीलों ने जोर देकर कहा था कि सबूत आरोपों का समर्थन नहीं करता है। गौरतलब है कि कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को होगी।
बता दें कि पत्रकार वा लोने और क्याव सोए ओ के खिलाफ दर्ज मामले में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जोरदार आलोचना की गई है। खास कर अधिकारियों द्वारा प्रेस को धमकाने पर निंदा की गई है। म्यांमार के रक्षा विभाग के अधिकारियों ने प्रेस द्वारा रखाइन प्रांत में संवेदनशील स्थिति का कवरेज करने पर दोनों पत्रकारों के खिलाफ यह कदम उठाया है। हालांकि बता दें कि म्यांमार की सेना पर रखाइन प्रांत में अल्पसंख्यक रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप हैं।

दोषी साबित होने पर 14 साल की जेल

गौरतलब है कि पिछले साल 12 दिसंबर को म्यांमार की पुलिस ने दोनों पत्रकारों को आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के उल्लंघन के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था। रखाइन में काम करने वाले दो पुलिस अधिकारियों ने ब्रिटिश समय में बने कानून "महत्वपूर्ण गुप्त कागजात" हासिल करने के तहत उन्हें गिरफ्तार किया था। यदि दोनों पत्रकार अदालत द्वारा दोषी करार दिये जाते हैं तो उन्हें 14 साल या उससे अधिक की सजा हो सकती है।

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मैं इन सब से खुश नहीं हूं : क्याव

बुधवार को कोर्ट से बाहर आकर पत्रकार क्याव सोए ओ ने कहा कि "मैं इन सब से खुश नहीं हूं।" वहीं वा लोने ने चिल्लाते हुए कहा कि "हम पत्रकार अपना कर्तव्य निभा रहे हैं, और लोकतंत्र में स्वतंत्र पत्रकारिता का अधिकार है। लेकिन अब हमलोग मुकदमा झेल रहे हैं और संभवतः 14 साल के लिए जेल भी भेज दिए जाएंगे। "

7 लाख रोहिंग्या बांग्लादेश में शरण लेने को मजबूर

गौरतलब है कि दोनों पत्रकार रॉयटर्स में काम करते थे और म्यांमार के रखाइन प्रांत में उपजे संकट को कवर कर रहे थे। रखाइन प्रांत में सुरक्षा बलों द्वारा मुस्लिम विद्रोहियों के प्रतिक्रिया में हुए हमले में लगभग 7 लाख मुस्लिम रोहिंग्या पड़ोसी देश बांग्लादेश में शरण लेने को मजबूर हुए हैं।

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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दोनों की रिहाई की उठी मांग

बता दें कि म्यांमार में दोनों पत्रकारों को जेल में डालने के मामले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है। इसी कड़ी में हाई प्रोफाइल वकील अमल क्लूनी जेल में बंद दोनों पत्रकारों का प्रतिनिधित्व करने वाली कानूनी टीम के साथ जुड़ गए हैं। वहीं ,संयुक्त राष्ट्र अमरीका, ब्रिटेन, और कनाडा के साथ संयुक्त राष्ट्र ने भी दोनों पत्रकारों को स्वतंत्र करने का आह्वान किया है।
आपको बता दें कि पिछले हफ्ते बचाव पक्ष के वकील ने जज से पूछा था "क्या दोनों पत्रकारों के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं, जो दोनों के गुनाह को साबित करते हो।" इस पर जवाब देते हुए जज ने कहा कि अभी 8 और गवाहों के बयान दर्ज करना बाकी है, जिसके बाद यह तय होगा कि वे दोनों दोषी हैं या नहीं।

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दोनों पत्रकार अपने कर्तव्य का निर्वाह कर रहे थे : एडलर

रॉयटर्स के अध्यक्ष और प्रधान संपादक स्टीफन जे. एडलर ने कहा कि कोर्ट के इस निर्णय से काफी निराश हैं। उन्होंने कहा कि कोर्ट के पास इस मामले को खारिज करने के लिए पर्याप्त सबूत थे। एक बयान में एडलर ने कहा कि दोनों पत्रकार म्यांमार में रिपोर्टिंग करने के लिए स्वतंत्र हैं और किसी भी तरह के कानून का उल्लंघन नहीं किया गया है। वे दोनों सिर्फ अपने कर्तव्य का निर्वाह कर रहे थे।