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PAK में तख्तापलट की संभावना तेज, पंजाब प्रांत के गवर्नर ने कहा- सैन्य शासन से कोई खतरा नहीं

पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति बहुत खराब है विपक्ष इमरान सरकार के खिलाफ लगातार आवाज बुलंद कर रहा है

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इस्लामाबाद। आर्थिक बदहाली के दौर से गुजर रहे पाकिस्तान में एक बार फिर से तख्तापलट की सुगबुगाहट तेज हो गई है। सेना की गतिविधियों और मौजूदा इमरान सरकार के हालात को देखते हुए यह कयास लगाए जा रहे हैं कि कभी भी तख्तापलट हो सकता है।

विपक्षी दलों के सरकार विरोधी प्रस्तावित मार्च व धरने और अर्थव्यवस्था की बदहाली के बीच पाकिस्तान में बार-बार यह बात सामने आ रही है कि क्या देश में एक बार फिर से मार्शल लॉ लगने वाला है।

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पंजाब के गवर्नर ने दिया बड़ा बयान

अब एक मंत्री के बयान सामने आया है जिससे देश में सैन्य शासन लगाने की चर्चा को बल मिला है। हालांकि सत्तारूढ़ नेताओं की तरफ से इन चर्चाओं और मंत्री के बयान को बेबुनियाद भी बताया जा रहा है।

बता दें कि ताजा बयान पंजाब प्रांत के गवर्नर चौधरी मोहम्मद सरवर ने दिया है। सरवर ने अपने बयान में कहा है कि देश में सैनिक शासन लगाए जाने का कोई खतरा नहीं है। इससे दो दिन पहले पाकिस्तान के रेलवे मंत्री शेख रशीद ने कहा था कि जब भी उलेमा सड़कों पर उतरकर आंदोलन करते हैं, देश में सैन्य शासन लग जाता है।

शेख रशीद ने जमीयत उलेमाए इस्लाम-फजल के 31 अक्टूबर को इस्लामाबाद में प्रस्तावित मार्च और धरने के संदर्भ में यह बात कही थी।

विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने किया खारिज

पाकिस्तानी मीडिया में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, सैन्य शासन की आशंकाओं को खारिज करते हुए पंजाब के गवर्नर चौधरी मोहम्मद सरवर ने लाहौर में कहा कि इसका कोई खतरा नहीं है और देश का भविष्य स्थायी लोकतंत्र के साथ बंध चुका है।

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उन्होंने कहा कि विपक्ष के शांतिपूर्ण प्रदर्शन से सरकार को कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन, अगर कोई कानून को अपने हाथ में लेने की कोशिश करेगा तो फिर सरकार की यह जिम्मेदारी है कि वह उसके खिलाफ कार्रवाई करे। संविधान और कानून के राज को हर चीज से ऊपर रखा जाएगा।

दो दिन पहले शनिवार को उस वक्त भी पाकिस्तान में मार्शल लॉ की बात सुर्खियां बनी थीं जब विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने मुलतान में इसका जिक्र किया था। हालांकि, उन्होंने भी साफ कहा था कि देश में सैन्य शासन लगने की कोई संभावना नहीं है।

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