5 फ़रवरी 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

श्रीलंका संकट पर अमरीका सख्त, कहा- नेतृत्व तय करने के लिए संवैधानिक प्रक्रिया का पालन हो

श्रीलंका में राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना के पिछले शुक्रवार को रानिल विक्रमसिंघे को प्रधानमंत्री पद से बर्खास्त कर दिया था और उनकी जगह पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे को इस पद पर नियुक्त कर दिया था।

2 min read
Google source verification
srilanka

श्रीलंका संकट पर अमरीका सख्त, कहा- नेतृत्व तय करने के लिए संवैधानिक प्रक्रिया का पालन हो

श्रीलंका में चल रहे राजनीतिक संकट पर अमरीका सख्त होने की कोशिश कर रहा है। अमरीका ने कहा है कि फिलहाल उसका ध्यान इस बात पर है कि श्रीलंका अपने नेतृत्व को तय करने के लिए जरूरी संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करे। अमरीका के विदेश मंत्रालय के उप प्रवक्ता रॉबर्ट पालाडिनो ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अमरीका का सारा ध्यान अभी सिर्फ संवैधानिक प्रक्रिया के पालन पर ही है।

उन्होंने कहा कि- अमरीका राष्ट्रपति से अपील करता है कि वह तत्काल स्पीकर से बातचीत करके संसद का सत्र बुलाएं। इसके साथ ही लोकतांत्रिक ढंग से निर्वाचित प्रतिनिधियों को सरकार का नेतृत्व करने वाले का चयन करने का उत्तरदायित्व प्रदान करें।

ये भी पढ़ें: रूसी खुफिया एजेंसी के कार्यालय पर आत्मघाती हमला, 17 वर्षीय किशोर ने खुद को उड़ाया

बता दें, श्रीलंका में राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना के पिछले शुक्रवार को रानिल विक्रमसिंघे को प्रधानमंत्री पद से बर्खास्त कर दिया था और उनकी जगह पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे को इस पद पर नियुक्त कर दिया था। इससे देश में राजनीतिक संकट की स्थिति पैदा हो गई थी।

पालाडिनो ने कहा कि हम सभी पक्षों से आग्रह करते हैं कि वे कानून को ध्यान में रखते हुए उचित प्रक्रिया का पालन करें। हालांकि, उन्होंने इस सवाल का जवाब नहीं दिया कि क्या अमरीका, श्रीलंका के नए प्रधानमंत्री को मान्यता देता है या नहीं। पालाडिनो ने कहा कि- यह संसद को तय करना है कि प्रधानमंत्री कौन होना चाहिए।

ये भी पढ़ें: पाकिस्तान और चीन के बीच बस चलाने की तैयारी, भारत ने जताया विरोध

बता दें कि रानिल विक्रमसिंघे को प्रधानमंत्री पद से अचानक हटा दिया गया था। इससे देश में राजनीतिक संकट पैदा हो गया था। हालांकि, राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना का कहना है कि अगर संसद के इस सत्र में रानिल विक्रमसिंघे को बुलाया गया या फिर उन्हें दोबारा प्रधानमंत्री बनाने की कोशिश की गई तो वह अपने पद से इस्तीफा दे देंगे।

दूसरी ओर, संसद के स्पीकर कारू जयसूर्या ने चेताया है कि वह महिंद्रा राजपक्षे को प्रधानमंत्री की कुर्सी पर किसी भी हाल में नहीं बैठने देंगे। स्पीकर कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि वह संसद में राजपक्षे को पीएम की कुर्सी पर नहीं बैठने देंगे। जानकारों का मानना है कि श्रीलंका में हुए सारे घटनाक्रम का मकसद सांसदों को विक्रमसिंघे के पाले से राजपक्षे के समर्थन में लाने के लिए समय हासिल करना था, ताकि वह 225 सदस्यीय संसद में बहुमत के लिए 113 का आंकड़ा जुटाया जा सके।