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क्या सच होगी भविष्यवाणी, अगर मिल गए ये 2 पर्वत तो लुप्त हो जाएंगे केदार-बद्रीनाथ

बद्री और केदार जैसे प्राचीन तीर्थों को लेकर भी एक भविष्यवाणी है जिसके मुताबिक पृथ्वी पर एक दिन ऐसा आएगा जब ये लुप्त हो जाएंगे और प्रलय आ जाएगी।
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टोंक

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Rajeev sharma

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Updated: 19 Nov 2016, 10:44 AM IST

क्या बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम कभी धरती से लुप्त हो जाएंगे? वर्ष 2013 में प्रकृति के कहर के बाद यह आशंका जताई जा रही थी कि इन प्राचीन तीर्थों की यात्रा प्राकृतिक प्रकोप के कारण अवरुद्ध हो जाएगी। प्रलय और प्रकृति संबंधी कई भविष्यवाणियां समय-समय पर सुर्खियों में रहती हैं लेकिन उनकी सत्यता कितनी है, यह वक्त ही बताएगा।

बद्री और केदार जैसे प्राचीन तीर्थों को लेकर भी एक भविष्यवाणी है जिसके मुताबिक पृथ्वी पर एक दिन ऐसा आएगा जब ये लुप्त हो जाएंगे और प्रलय आ जाएगी। इस मान्यता के अनुसार, भविष्य में गंगा नदी पुनः स्वर्ग के लिए प्रस्थान करेगी और उसके किनारे बसे तीर्थों का महत्व समाप्त हो जाएगा। धीरे-धीरे लोगों के मन से भी तीर्थ और पुण्य जैसी शुभ भावनाएं खत्म हो जाएंगी।

जब गंगाजी धरती पर प्रकट हुईं तो उसकी 12 धाराएं अलग-अलग स्थानों की ओर गईं। जो बद्रीनाथ की ओर आई उसे अलकनंदा कहा गया। यहां भगवान विष्णु का निवास था। इसी प्रकार जो धारा केदार घाटी की ओर गई उसे मंदाकिनी कहा गया। केदार घाटी को साक्षात शिव के धाम की ओर जाने वाला मार्ग माना जाता है।

यहां दो पहाड़ हैं। नर और नारायण। जिस दिन ये दोनों पर्वत आपस में मिल जाएंगे और बद्रीनाथ का मार्ग पूरी तरह से अवरुद्ध हो जाएगा, भक्त अपने भगवान का दर्शन इस मार्ग से नहीं कर सकेंगे, तब विनाश की शुरुआत होगी। पौराणिक मान्यताएं बताती हैं कि इससे बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम लुप्त हो जाएंगे। तब कई वर्षों बाद भगवान अपने नए तीर्थ के रूप में प्रकट होंगे। उसका नाम भविष्यबद्री होगा।

इससे जुड़ी एक और मान्यता भी है। कहते हैं कि यहां के जोशी मठ में भगवान नृसिंह की एक अतिप्राचीन मूर्ति विराजमान है। उस मूर्ति का एक हाथ हर साल धीरे-धीरे पतला हो रहा है। जिस दिन यह पूरी तरह से अलग हो जाएगा, ये तीर्थ लुप्त हो जाएंगे तथा प्रलय की शुरुआत हो जाएगी।