
भोपाल। इस वर्ष की अंतिम त्रयोदशी (प्रदोष) तिथि 21 दिसंबर 2022 यानि आज बुधवार को है। इस दिन पौष माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी है। आगमों व पुराणों में त्रयोदशी तिथि भगवान भोलेनाथ को समर्पित मानी गई है। यही कारण है कि इस दिन देवों के देव महादेव का अभिषेक किया जाता है। उनकी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत एवं शिव की आराधना करने पर विशेष फल की प्राप्ति होती है। ऐसे भक्तों को मोक्ष तो मिलता ही है, वे इस पृथ्वी पर भी समस्त प्रकार के सुख व सौभाग्य प्राप्त करते हैं। भोपाल के पंडित जगदीश शर्मा आपको बता रहे हैं कैसे की जाती है त्रयोदशी के इस व्रत में क्यों की जाती है शिव भगवान की विशेष पूजा...
त्रयोदशी पर ऐसे की जाती है शिव की पूजा
महादेव सभी देवों के भी देव हैं। माना जाता है कि इस पूरी सृष्टि में ऐसी कोई चीज या वरदान नहीं, जो वह नहीं दे सकते हैं। यही कारण है कि देवता, मनुष्य, राक्षस सभी उनकी पूजा करते हैं। आप यदि किसी विशेष उद्देश्य को लेकर उनकी आराधना करना चाहते हैं तो प्रदोष पर रुद्राभिषेक करवा सकते हैं या सहस्रघट करवा सकते हैं। यदि आप ऐसा नहीं करवा सकते हैं तो अपने घर के पास किसी शिव मंदिर में जाकर भी पूजा कर सकते हैं। इसके लिए मंदिर में जाकर शिवलिंग व शिव पंचायत को गंगाजल व पंचगव्य से स्नान कराएं। शिवलिंग, मां पार्वती, गणेशजी, कार्तिकेय व नंदी को पुष्प, माला, प्रसाद आदि अर्पित करें। इसके बाद उनकी आरती करें और यथासंभव उनके पंचाक्षरी मंत्र 'ऊं नम: शिवाय' का ज्यादा से ज्यादा जाप करें। इस प्रकार आपकी पूजा पूर्ण होगी। कहा जाता है कि शिव की पूजा समस्त फलों को देने वाली है। यही नहीं, उनकी आराधना से जन्मकुंडली में महाराजयोग का निर्माण हो सकता है।
त्रयोदशी पर करें ये उपाय
अलग-अलग उद्देश्यों के लिए भगवान शिव का अलग-अलग वस्तुओं से अभिषेक करने का विधान बताया गया है। समस्त सुखों की प्राप्ति के लिए दूध से अभिषेक किया जाता है। कॅरियर में ग्रोथ के लिए गन्ने के जूस से, किसी विशेष इच्छा की पूर्ति के लिए पांच अलग-अलग फलों के जूस से, धन की प्राप्ति के लिए शहद अथवा घी से अभिषेक करना चाहिए। आप भी किसी योग्य विद्वान की सहायता से इनमें से कोई भी एक उपाय को अपना सकते हैं।
प्रदोष पर करें इन नियमों का पालन
- इस दिन केवल फलाहार करें, स्वास्थ्य संबंधी कारण होने पर इस नियम को भंग जा सकता है।
- इस दिन जितना संभव हो, दूसरों की सहायता करें। किसी का भी तिरस्कार या अपमान न करें।
- प्रदोष व्रत के दिन पूरे नियम और ब्रह्मचर्य के साथ रहें। मन में किसी भी तरह का बुरा विचार न लाएं।
- मांस, मदिरा, अंडा, शराब, नशीले पदार्थों आदि का सेवन भूल से भी न करें।
यह है त्रयोदशी पूजा के शुभ मुहूर्त
इस बार त्रयोदशी 21 दिसंबर को रात्रि 10.16 बजे तक रहेगी। इस दिन सुबह 8.33 बजे तक विशाखा और उसके बाद अनुराधा नक्षत्र रहेगा। इस बार त्रयोदशी सर्वार्थ सिद्धी योग और अमृत सिद्धि योग में आ रही है। अमृत सिद्धि योग सुबह 8.33 बजे से अगले दिन (22 दिसंबर) सुबह 6.33 बजे तक रहेगा। इसी प्रकार सर्वार्थसिद्धी योग सुबह 8.33 बजे से अगले दिन सुबह तक रहेगा। चौघडिय़ा की बात करें तो सुबह 7.11 बजे से 9.48 तक क्रमश: लाभ व अमृत का चौघडिय़ा रहेगा। इसके बाद दोपहर 11.07 बजे से 12.25 बजे तक शुभ का चौघडिय़ा रहेगा। इनमें से किसी भी शुभ मुहूर्त में पूजा की जा सकती है।
Published on:
21 Dec 2022 01:26 pm
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