
राम मंदिर दान विवाद केस अपडेट। फोटो सोर्स-पत्रिका न्यूज
Ayodhya Ram Mandir Donation Dispute Row: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कथित चढ़ावा चोरी मामले की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। पुलिस रिमांड पर लिए गए आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव से पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। वहीं दूसरी ओर, निर्मोही अखाड़ा और हिंदू महासभा की ओर से ट्रस्ट को भंग करने की मांग के बाद ट्रस्ट डीड और सुप्रीम कोर्ट के 2019 के फैसले को लेकर भी नई बहस शुरू हो गई है।
पुलिस रिमांड के दौरान आरोपी टिन्नू यादव से एक फाइल बरामद हुई, जिसमें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक, फाइल में मंदिर परिसर के लिए खरीदी गई जमीनों, मुआवजे और अन्य प्रशासनिक मामलों से संबंधित दस्तावेज शामिल हैं।
प्रारंभिक जांच में पुलिस को ऐसे दस्तावेज भी मिले हैं, जो सामान्य परिस्थितियों में टिन्नू यादव के अधिकार क्षेत्र में नहीं होने चाहिए थे। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि उसके पास ये दस्तावेज कैसे पहुंचे और वह ट्रस्ट के कामकाज में किस स्तर तक भूमिका निभा रहा था।
सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान टिन्नू यादव ने बताया कि चढ़ावे की गणना के लिए किन कर्मचारियों की ड्यूटी कब लगाई जाएगी, इसका निर्णय वह स्वयं करता था। इसके बाद गणना प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव उसी सूची के आधार पर कर्मचारियों की तैनाती करता था। जांच एजेंसियां इस दावे की भी पड़ताल कर रही हैं कि ड्यूटी तय होने के बाद कुछ आरोपी कथित तौर पर चढ़ावे की रकम निकालने में सफल हो जाते थे। पुलिस इन दावों का उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सत्यापन कर रही है।
पुलिस ने पूछताछ के दौरान टिन्नू यादव से उसकी संपत्तियों, हॉस्टल और अन्य निवेशों के बारे में भी सवाल किए। टिन्नू ने दावा किया कि उसकी सभी संपत्तियां काफी पुरानी हैं और उस समय की हैं, जब वह मंदिर से जुड़ा भी नहीं था। हालांकि जांच एजेंसियों को आशंका है कि कुछ निवेश रिश्तेदारों या परिचितों के माध्यम से किए गए हो सकते हैं। इसी संभावना को देखते हुए पुलिस ने आर्थिक जांच का दायरा और बढ़ा दिया है।
इसी बीच, निर्मोही अखाड़े ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग करने की मांग उठाई है। इससे पहले हिंदू महासभा भी ऐसी मांग कर चुकी है। इसके बाद ट्रस्ट की कानूनी स्थिति और उसके गठन को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
9 नवंबर 2019 को दिए गए ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को 3 महीने के भीतर अयोध्या अधिनियम, 1993 की धारा 6 और 7 के तहत एक योजना बनाकर ट्रस्ट गठित करने का निर्देश दिया था। अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि योजना में ट्रस्ट का गठन, उसका प्रबंधन, ट्रस्टियों की शक्तियां, मंदिर निर्माण और उससे जुड़े अन्य आवश्यक प्रावधान शामिल किए जाएं। इसी आदेश के अनुपालन में केंद्र सरकार ने 5 फरवरी 2020 को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया था।
उपलब्ध ट्रस्ट डीड के अनुसार, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को 'अपरिवर्तनीय (Irrevocable)' ट्रस्ट के रूप में स्थापित किया गया है। इसका अर्थ यह है कि ट्रस्ट को समाप्त या निरस्त करने का कोई स्पष्ट प्रावधान ट्रस्ट डीड में मौजूद नहीं है। कानूनी प्रावधानों के अनुसार, ट्रस्टियों में बदलाव किया जा सकता है और ट्रस्ट डीड की कुछ धाराओं में सीमित संशोधन संभव हैं, लेकिन पूरे ट्रस्ट को भंग करने का अधिकार या प्रक्रिया ट्रस्ट डीड में निर्धारित नहीं की गई है।
एक ओर पुलिस कथित चढ़ावा चोरी मामले में आर्थिक, प्रशासनिक और डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है, वहीं दूसरी ओर ट्रस्ट को लेकर उठे कानूनी सवालों पर भी सभी की नजर बनी हुई है। अब आगे की कार्रवाई जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और न्यायालय में होने वाली सुनवाई के आधार पर तय होगी।
वहीं, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कथित चढ़ावा चोरी मामले की जांच अब आर्थिक लेनदेन और कारोबारी गतिविधियों तक पहुंच गई है। मामले में जेल में बंद आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव की पत्नी पूनम के नाम पर पंजीकृत एक फर्म की वित्तीय जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस ने फर्म से जुड़े दस्तावेज जुटाने के लिए स्टेट GST विभाग से संपर्क किया है।
जांच एजेंसियों ने पूनम के नाम से संचालित फर्म का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। पुलिस अब फर्म के टर्नओवर, GST भुगतान, बैंक खातों, आय-व्यय, रिटर्न और अन्य वित्तीय दस्तावेजों का मिलान करेगी। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि फर्म का वास्तविक कारोबार कितना है और उसकी आय के स्रोत क्या हैं।
पुलिस जांच के दायरे में आई फर्म का नाम 'सौंदर्य कंस्ट्रक्शन एंड सप्लायर' है, जो टिन्नू यादव की पत्नी पूनम के नाम से पंजीकृत बताई जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह फर्म लोक निर्माण विभाग (PWD) से जुड़े कार्यों के जरिए हर वर्ष लाखों रुपये का कारोबार करती है। अब जांच एजेंसियां यह भी पता लगाएंगी कि फर्म के माध्यम से हुए वित्तीय लेनदेन और उसके दस्तावेज वास्तविक कारोबारी गतिविधियों से मेल खाते हैं या नहीं।
सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियों को आशंका है कि कथित तौर पर अवैध रूप से अर्जित धन को वैध दिखाने के लिए इस फर्म का इस्तेमाल किया गया हो सकता है। इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए पुलिस फर्म के बैंकिंग लेनदेन, टैक्स रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की विस्तृत जांच करेगी। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है और जांच जारी है।
पुलिस ने रिमांड के दौरान टिन्नू यादव से उसकी पत्नी के नाम पर पंजीकृत फर्म और उससे जुड़े निवेश के बारे में भी पूछताछ की है। जांच एजेंसियां अब पूछताछ में मिली जानकारी का दस्तावेजी रिकॉर्ड से मिलान कर रही हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि फर्म में निवेश का स्रोत क्या था और उसका वास्तविक स्वरूप क्या है।
Updated on:
20 Jul 2026 10:49 am
Published on:
20 Jul 2026 10:49 am
