
अयोध्या राम मंदिर - फोटो : X-Ayodhya Darshan
Ram Mandir Donation Controversy: अयोध्या में जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने राम मंदिर चंदा विवाद को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने भगवान श्रीराम के अस्तित्व पर सवाल उठाए, उसे राम मंदिर से जुड़े मामलों पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से विपक्ष की मांग पर विचार करने की अपील भी की। परमहंस आचार्य ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आंदोलन पर भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि उन्होंने पहले प्रधानमंत्री को पत्र लिखा होता तो उनकी बात पर गंभीरता से विचार किया जा सकता था।
संसद में विपक्ष द्वारा राम मंदिर के चंदे की चोरी का मुद्दा उठाए जाने पर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने पहले भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाए और उन्हें भगवान राम काल्पनिक बताया, जिसके बाद उन्हें राम मंदिर से जुड़े मामलों पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है। हालांकि उन्होंने कहा, 'फिर भी, यदि वे यह मांग रख रहे हैं, तो मैं भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अनुरोध करूंगा कि वे इस पर विचार करें और उनकी बात मानें।'
सोनम वांगचुक के बयान और उनके आंदोलन पर प्रतिक्रिया देते हुए जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने कहा कि यदि सोनम वांगचुक ने आंदोलन करने के बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा होता, तो उनकी चिंताओं पर विचार किया जा सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान राष्ट्रविरोधी नारे लगाए गए, भगवान राम और माता सीता के कथित अपमान की बातें कही गईं, आरएसएस के सदस्यों के खिलाफ अपशब्द बोले गए, देश को बांटने की बातें हुईं जो कि निंदनीय है।
उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक को यह शर्त रखनी चाहिए कि उनके आंदोलन में शामिल होने वाला हर व्यक्ति केवल परीक्षाओं और छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर ही बात करे।
22 जुलाई को होने वाली राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक को लेकर परमहंस आचार्य ने कहा कि यह बैठक महत्वपूर्ण है और पूरे देश की नजर इस पर बनी हुई है। उन्होंने कहा कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होनी चाहिए, ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और किसी निर्दोष को बेवजह न फंसाया जाए। उन्होंने कहा, 'हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि दोषियों को बख्शा न जाए और निर्दोषों को फंसाया न जाए। यदि व्यक्तिगत दुश्मनी या निमंत्रण न मिलने से नाराज होकर निर्दोषों पर आरोप लगाए जा रहे हैं, तो ऐसे निराधार आरोपों को नजरअंदाज किया जाना चाहिए। जो निर्दोष हैं, उन्हें पूरे सम्मान के साथ अपने पदों पर बने रहना चाहिए, जबकि दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।'
Updated on:
20 Jul 2026 04:18 pm
Published on:
20 Jul 2026 04:18 pm
