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Ram Mandir Row: अवैध निर्माण मामले में आरोपी की पत्नी को राहत! ADA ने दस्तावेज देने के लिए दिया 1 हफ्ते का समय

Luv Kush Mishra: पुलिस ने बताया कि अयोध्या डेवलपमेंट अथॉरिटी (ADA) ने राम मंदिर डोनेशन मामले में आरोपी लव कुश मिश्रा की पत्नी सुप्रिया मिश्रा को अयोध्या के सआदतगंज इलाके में उनके नाम पर बन रहे घर के डॉक्यूमेंट देने के लिए एक और हफ्ता दिया है।
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Lavkush Mishra property

लवकुश मिश्रा की प्रॉपर्टी - Photo ANI

Ayodhya Ram Temple Donation Row: अयोध्या राम मंदिर के चंदे में हुए गबन के मामले में आरोपी लव कुश मिश्रा की पत्नी सुप्रिया मिश्रा को अयोध्या विकास प्राधिकरण (ADA) ने एक हफ्ते का और समय दे दिया है। उन्हें अपने यहां बन रहे मकान के कागजात जमा करने के लिए यह मोहलत मिली है। अयोध्या के सादतगंज इलाके में सुप्रिया मिश्रा के नाम पर एक मकान बन रहा है। प्राधिकरण का कहना है कि बिना जरूरी मंजूरी के निर्माण कार्य शुरू किया गया। 2 जुलाई को नोटिस जारी होने के बाद 29 जुलाई तक दस्तावेज जमा करने को कहा गया था। लेकिन गुरुवार को सुप्रिया ने और समय मांगा, तो प्राधिकरण ने एक हफ्ता और बढ़ा दिया।

बिना जरूरी मंजूरी के निर्माण करने का आरोप

ADA के सचिव राजेश मिश्रा ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि सोहावल तहसील के बनवीरपुर गांव में जमीन खरीदी गई है और उसी पर निर्माण हो रहा है। प्राधिकरण के अनुसार, बिना मंजूरी के काम शुरू करना नियमों का उल्लंघन है।
यह खबर ऐसे समय आई है जब राम मंदिर ट्रस्ट के चंदा घोटाले की जांच पर सवाल उठ रहे हैं। विपक्षी पार्टियां कह रही हैं कि जांच सिर्फ छोटे-मोटे कर्मचारियों और ठेकेदारों तक सीमित रखी गई है। बड़े लोग बचाए जा रहे हैं।

अब तक आठ लोग गिरफ्तार

जून के पहले हफ्ते में जब घोटाले की बात सामने आई, तो उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को SIT गठित की। SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर 25 जून को FIR दर्ज हुई। अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें लव कुश मिश्रा भी शामिल हैं। बाकी लोग भी ट्रस्ट से जुड़े कर्मचारी, ठेकेदार या चंदा संभालने वाले लोग हैं।

चंपत राय पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप

पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया, लेकिन उन पर अभी कोई कार्रवाई नहीं हुई। कांग्रेस समेत कई विपक्षी नेता पूछ रहे हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पूरे मामले पर चुप क्यों हैं? उन्होंने 2020 में संसद में ट्रस्ट बनाने की घोषणा की थी।

आपको बात दें कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर SIT को फिर से गठित किया गया है। अब इसकी कमान आईजी किरण एस के पास है। कोर्ट ने कहा है कि जांच की नियमित रिपोर्ट दी जाए और फॉरेंसिक ऑडिट एक्सपर्ट भी शामिल किया जाए।

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