आजमगढ़ के अजमतगढ़ मदरसे में है औरंगजेब की हस्तलिखित सोने की कुरआन, चोर ने लाकर मदरसे में करायी थी जमा।
रण विजय सिंह
आजमगढ़. अजमतगढ़ विकास खण्ड क्षेत्र का अंजान शहीद गांव ऐतिहासिक धरोहरों को समेटे हुए है। यहां दारुल उलूम मदरसे के पुस्तकालय में औरंगजेब की हस्तलिखित डेढ़ हजार पन्नों की कुरान शरीफ आज भी मौजूद है। इसकी पुष्टिï मदरसे के नाजिम अब्दुल मन्नान चिश्ती करते हैं। खास बात तो यह है कि काली स्याही से लिखी कुरान के पन्नों के खाली जगह सोने के पानी से भरे गये हैं। इसके अलावा पुस्तकालय में कुल बारह हजार के आसपास पुस्तकें हैं।
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इसी स्थान पर एक पक्की कब्रिस्तान भी है जिसके बारे में कहा जाता है कि 1857 की क्रान्ति के दौरान यहां पर एक जवान शहीद हो गया था। उसका कोई वारिस काफी खोजबीन के बाद भी जब नहीं मिला तो मुस्लिम समुदाय का होने के नाते वहीं पर दफन कर कब्रिस्तान बना दिया गया। शहीद के अंजान होने के नाते उस स्थान का नाम अंजान शहीद पड़ गया। हालांकि इस कब्र की समुचित देखरेख नहीं हो पा रही है जिससे कब्र के निशान भी मिट सकते हैं।
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हस्तलिखित कुरान के बारे में मदरसे के नाजिम अब्दुल मन्नान चिश्ती ने बताया कि लगभग सत्तावन वर्ष पहले की बात है, उस समय अपने पिता रफी खान के साथ विद्यालय परिसर में बैठे थे। उसी दौरान उस समय लगभग 45 वर्षीय सांवले रंग का कुर्ता-पैजामा पहने एक व्यक्ति पहुंचा और कहा कि यह पुस्तक आपके मजहब की है इसलिए इसे रख लें। पुस्तक के पन्नों पर सोने का पानी देख पिता जी की आंखें चौंधिया गयीं।
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आने वाले व्यक्ति से पुस्तक के बारे में पूछताछ की गयी तो उसने बताया कि वह एक चोर है और चोरी उसका काम है। यह पुस्तक एक सेठ के यहां चोरी के दौरान उसकी तिजोरी में मिली। पुस्तक धार्मिक होने के कारण उसके पन्नों से सोना निकालना मुनासिब नहीं समझा। बकौल मन्नान उनके पिता ने उस धार्मिक पुस्तक को अपने पास रख लिया। इसके अलावा पुस्तकालय में अबुल कलाम आजाद द्वारा उर्दू भाषा में निकलने वाला अखबार व तमाम ऐतिहासिक पुस्तकें भी मौजूद हैं। कुल मिलाकर यहां स्थित अंजान शहीद की कब्र व ताल पोखरों का अस्तित्व रखरखाव के अभाव में सिमटता जा रहा है।