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बिना निमंत्रण नहीं जाना चाहिए पिता, मित्र व गुरू के घर, शिव ने सती को दी थी सलाह

माता सती की कथा सुनकर मंत्रमुग्ध हुए लोग

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शिव ने सती को दी थी सलाह, बिना निमंत्रण नहीं जाते पिता, मित्र व गुरू के घर

शिव ने सती को दी थी सलाह, बिना निमंत्रण नहीं जाते पिता, मित्र व गुरू के घर

आजमगढ़. श्रावण मास में श्री गौरी शंकर मंदिर सिधारी परिसर में चल रहे श्री शिव महापुराण कथा में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। मंगलवार को आचार्य पंडित अजय भारद्वाज पैन्यूली ने माता सती की कथा का वर्णन कर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस दौरान भक्तों द्वारा लगाये गये जयकारे से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा।

पंडित अजय भारद्वाज ने भगवान शिव के ससुराल में हो रहे यज्ञ का विधिवत् वर्णन करते हुए कहा कि ब्रह्मा जी के पुत्र दक्ष के यहां माता सती का जन्म हुआ। उनका विवाह भगवान शिव से हुआ। दोनों लोग कैलाश पर्वत पर विराजमान थे। एक दिन माता पार्वती ने देखा कि देवताओं का विमान कैलाश पर्वत के उपर से कहीं जा रहा है। तो उन्होंने भगवान शिव से पूछा। भगवान शिव ने उत्तर देते हुए बताया कि हे देवी ये सभी देवता तुम्हारे पिता राजा दक्ष के घर यज्ञ में शामिल होने को जा रहे है। यह सुन माता सती ने कहा कि आप और हमें भी उस यज्ञ में जाना चाहिए।

उनकी बात को सुनकर भगवान शिव ने कहा कि यद्यपि पिता मित्र और गुरू के घर बिना निमंत्रण के नहीं जाना चाहिए। यह कल्याणकारक नहीं होता। भगवान शिव के समझाने के बाद भी माता सती नहीं मानी और वह यज्ञ में जाने के लिए तैयार हो गयी। माता नंदी की सवारी करके पिता के घर पहुंच गयी। वहां उन्होंने अपने पिता से पूछा कि हे पिता आपने सभी देवताओं को यज्ञ में सम्मिलित हेने के लिए निमंत्रण दिया लेकिन मेरे पति को आपने क्यूं नहीं बुलाया। आपका यह यज्ञ कल्याणकारी नहीं होगा।

माता सती ने अपने पति भगवान शिव का ध्यान करते हुए योग्नाग्नि में प्रवेश किया। इसके बाद शिवगणों में हाहाकार मच गया। शिवगणों और दक्ष के बीच युद्ध होने लगा। इसी दौरान सती दाह एवं शिवगणों के युद्ध में प्रताड़ित करने पर भगवान शंकर को क्रोध आया और अपने सिर से एक जटा उखाड़कर कैलाश पर्वत पर मारा जहां वीरभद्र की उत्पत्ति हुई। भगवान शिव ने वीरभद्र को दक्ष यज्ञ को विध्वंस करने का आदेश दिया। वीरभद्र यज्ञ स्थल पर पहुंचकर सभी को दंडित करते राजा दक्ष का सिर काट कर यज्ञ में डाल दिया।

इसके बाद सभी देवताओं ने भगवान शिव से प्रार्थना करते हुए कहा कि इस यज्ञ को पूरा करने के लिए राजा दक्ष का जीवित रहना बहुत जरूरी है। देवताओं के आग्रह पर भगवान शिव ने बकरे का शीश राजा दक्ष को लगाया। भगवान शिव ने माता सती के शरीर को चारों दिशाओं में घुमाया तब नारायण चक्र से माता सती के शरीर के 52 टुकड़े हुए। जो विभिन्न जगहों पर गिरे और विभिन्न नामों जैसे पल्हना देवी, नैना देवी, ज्वाला देवी, कामख्या देवी, विन्ध्यवासिनी आदि नामों से प्रख्यात हुआ। इस अवसर पर नायक यादव, जितेन्द्र अस्थाना, रमाकांत गुप्ता, रामसुधार, निर्मल मौर्य, मुफिर यादव, राजू, अर्चना सिंह, पम्मी, विद्या देवी, पहाड़ी राम, चांदनी देवी, रामसुभग, कलावती, शिव कुमारी, सुनीता सिंह आदि उपस्थित थी।

By- रणविजय सिंह