
बड़ी खबरः सपा-बसपा गठबंधन के साथ नहीं इस बड़ी पार्टी के साथ लोकसभा चुनाव लड़ेगी रालोद!
सचिन त्यागी/बागपत. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चौधरी चरण सिंह की विरासत को अगर धक्का लगा है तो इसका कारण चौधरी अजित सिंह मोदी लहर को ही मानते हैं। यह बात चौधरी अजित सिंह पहले ही साफ कर चुके हैं। वहीं मुजफफरनगर दंगे के बाद पश्चिम के हालात बदले हैं और कई ऐसे जाट नेताओं ने यहां अपनी जगह बना ली है, जो चौधरी अजित सिंह को टक्कर देने के मूड में नजर आ रहे हैं। यही कारण है कि जाटलैंड में 35 साल तक राज करने वाले चौधरी अजित सिंह आज अकेले चुनाव लड़ने से घबरा रहे हैं। इसलिए गठबंधन में जगह पाने को भीख में मिल रही सीटों को लेकर भी उन्होंने कोई परहेज नहीं किया। जबकि जाटलैंड में चौधरी परिवार से जुडे कई नेता इससे इत्तेफाक रखते हैं। उनका मनना है कि चौधरी साहब को सभी सीटों पर चुनाव लड़कर अपनी ताकत का एक बार फिर से अहसास कराना चाहिए। वहीं खबर यह भी आ रही है कि चार सीटों पर समझौता रालोद को मंजूर नहीं है और वह जल्द ही कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं।
पश्चिम उत्तर प्रदेश के मंडल महासचिव ओमवीर ढाका का कहना है कि जो चार सीट की बात आ रही है, वह केवल अफवाह है। राजस्थान में कांग्रेस को हमारा समर्थन है। काग्रेंस सरकार में हमारे कई मंत्री हैं। यूपी में अभी तक कोई फैसला सीटों को लेकर नहीं लिया गया है। अभी केवल आैपचारिक बात ही चल रही है। सीटों की जब बात होगी तो सभी को सूचना दी जाएगी। केवल चार सीटों पर समझौता करना रालोद के ऐजेंडे में नहीं है। जल्द ही रालोद के फैसले से सभी को अवगत कराया जाएगा। इतना जरूर है कि पार्टी गठबंधन से चुनाव जरूर लड़ेगी।
वहीं 2014 में बागपत में चौधरी अजित सिंह के चुनाव की बागडौर संभालने वाले व पार्टी के वरिष्ठ नेता अरुण तोमर का कहना है कि चार सीटों के समझौते को लेकर अभी तक जो भी चर्चा हैं, सभी अफवाह हैं। अंतिम फैसला चौधरी साहब ही लेंगे। उनका जो भी फैसला होगा सभी को मान्य होगा। पार्टी सम्मान के साथ 2019 के चुनाव में उतरेगी।
वहीं पूर्व जिलाध्यक्ष अमित चौधरी का कहना है कि जाटलैंड में हम आज भी मजबूत स्थिति में हैं। एक समय था जब मोदी लहर में सब बह निकले थे, लेकिन आज मोदी के झूठे वादों की पोल खुल चुकी है। पार्टी सम्मान के साथ 2019 के चुनाव को लड़ेगी और रालोद को कम आंकने वालों को मुहतोड़ जवाब भी दिया जाएगा।
पार्टी नेताओं की बात की जाए तो चौधरी अजित सिंह का फैसला ही उनके लिए सर्वोपरी है, लेकिन सपा से राजनीति में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके भारतीय किसान यूनियन अध्यक्ष चौधरी राकेश टिकैट भी कहीं न कहीं अपनी साख बनाने के लिए जाटलैंड में चौधरी अजित सिंह के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। किसान आंदोलन से वह पहले ही अपनी ताकत का अहसास करा चुके हैं। भले ही किसान आंदोलन को कई राजनीतिक दलों का समर्थन रहा हो, लेकिन हर कोई चाहता है कि वह राजनीति का खिलाड़ी बने। चौधरी राकेश टिकैत भी आज के समय राजनीति में उतरने के पूरे मूड में हैं, जो रालोद के लिए खतरे की घंटी भी बन सकते हैं।
कांग्रेस के साथ चुनाव में हो सकता है गठजोड़
रालोद नेताओं की बात से साफ जाहिर हो चुका है कि दो सीट देकर सपा व बसपा ने जो किरकरी रालोद की करार्इ है। उससे चौधरी साहब ही नहीं पार्टी के पदाधिकारी भी नाराज हैं। आने वाले चुनाव में सभी गठबंधन की बात करते नजर आ रहे हैं और कांग्रेस की तारीफ भी जिससे साफ हो जाता है कि रालोद जल्द ही कांग्रेस के साथ यूपी में गठबंधन की घोषणा कर सकती है। चार सीटों पर समझौते को सभी ने नकार दिया है।
Published on:
24 Jan 2019 06:21 pm
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