
प्रतीकात्मक तस्वीर
CG News: बालोद जिला प्रशासन बाल विवाह मुक्त जिला बनने का दावा कर रहा है और वाहवाही लूट रहा है। वहीं, जिले के एक परिवार ने अपने नाबालिग बेटे की शादी राजनांदगांव जिले की एक बालिग लड़की से करा दी। बताया जा रहा है कि लड़के की तय उम्र से दो माह पहले ही विवाह करा दिया गया। इसकी भनक जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग को नहीं लगी।
महिला एवं बाल विकास विभाग का कहना है कि 20 वर्ष 10 माह आयु के लड़के का विवाह राजनांदगांव में लड़की के घर हुआ है, इसलिए बाल विवाह राजनांदगांव में हुआ, बालोद में नहीं। जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग अपनी नाकामियों को छिपा रहे हैं, लेकिन यह सच है कि यहां प्रशासनिक चूक हुई है।
मामला उजागर होने के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम ग्राम भर्रीटोला पहुंची। लड़के पक्ष के घर टीकावन कार्यक्रम से पहले इस शादी को रोका गया और विवाह को शून्य घोषित किया गया। अब दोनों का विवाह दो माह बाद फिर होगा। बताया जा रहा है कि उस समय लड़का शादी योग्य हो जाएगा।
ग्रामीणों और महिला एवं बाल विकास विभाग के मुताबिक, लड़के की उम्र वर्तमान में 20 साल 10 माह है। उसे बालिग होने में अभी दो माह का समय लगेगा। युवक ने मंगलवार-बुधवार की रात दुल्हन के घर जाकर सात फेरे लिए और लड़की की मांग में सिंदूर भरकर शादी की रस्म निभाई। इसके बाद दुल्हन को विदा कराकर अपने घर लाया।
बाल विवाह रोकने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग और जिला प्रशासन विशेष प्रशिक्षण देता है, जिसमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सरपंच, सचिव सहित अन्य लोग शामिल रहते हैं। जब लड़के की शादी तय हुई, तो आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने आधार कार्ड देखकर ही शादी की अनुमति दे दी, लेकिन दाखिला पंजी में उम्र कम होने की जानकारी सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया। प्रशिक्षण में दाखिला पंजी की जांच की जानकारी दी जाती है या नहीं, इस पर विभाग स्पष्ट जवाब नहीं दे पा रहा है।
जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी समीर पांडेय ने कहा कि युवक और युवती की इस शादी को शून्य घोषित कर दिया गया है। दुल्हन को सुरक्षित उसके घर राजनांदगांव भेजा गया है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि लड़के की उम्र 21 वर्ष या उससे अधिक और लड़की की उम्र 18 वर्ष या उससे अधिक होने पर ही शादी करें। बाल विवाह करना अपराध है और इसके लिए सजा भी हो सकती है।
बुधवार सुबह सोशल मीडिया पर शादी की जानकारी सामने आने के बाद मामला बढ़ गया। इसके बाद महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम ने विवाह को शून्य घोषित कर दिया। दुल्हन को पुलिस और विभाग की टीम ने उसके मायके राजनांदगांव भेज दिया।
महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम ने दूल्हे से आधार कार्ड मांगा, जिसमें उसकी जन्मतिथि 13 जून 2002 दर्ज है, जबकि स्कूल की दाखिला पंजी में जन्मतिथि 13 जून 2005 है। दाखिला पंजी में दर्ज जन्मतिथि को ही मान्य माना जाता है।
एसडीएम सुरेश साहू, महिला एवं बाल विकास अधिकारी समीर पांडेय और बाल संरक्षण अधिकारी गजानंद साहू ने लड़का और लड़की पक्ष को समझाया। पंचनामा और सहमति पत्र भरवाया गया। तय हुआ कि दो माह बाद, जब लड़का शादी योग्य हो जाएगा, तब दुल्हन को मायके से लाकर विवाह कराया जाएगा।
Updated on:
23 Apr 2026 05:07 pm
Published on:
23 Apr 2026 05:06 pm
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