
बालोद जिले में जल संचय अभियान के बाद भू-जल स्तर में सुधार हुआ है। अप्रैल में पीएचई के सर्वे के मुताबिक दो साल पहले 2024 में भू-जल स्तर 27 मीटर नीचे था, वह अब औसत 20 से 22 मीटर पर आ गया है। इस तरह लगभग 5 मीटर का सुधार हुआ है। अभी भी स्थिति में और सुधार की जरूरत है। हालांकि पीएचई का कहना है कि मई में तेज गर्मी पडऩे से भू-जल स्तर गिरने की संभावना है। बीते साल भू-जल स्तर 20 से 24 मीटर था। इसके पूर्व 2017 से जिले में लगातार भू-जल स्तर गिर रहा था। प्रशासन लोगों को जल संरक्षण के लिए जागरूक करने हर साल प्रचार-प्रसार में लाखों रुपए खर्च कर रहा है।
केंद्रीय भू-जल बोर्ड की डायनेमिक ग्राउंड वाटर रिसोर्सेज ऑफ इंडिया की साल 2025 की रिपोर्ट के अनुसार भू-जल स्तर जिले के लिए चिंता का कारण बन हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक देश के गिरते भू-जल स्तर मामले में बालोद के गुरुर ब्लॉक को क्रिटिकल जोन में रखा गया है। यहां भू-जल स्तर काफी तेजी से नीचे चला गया है।
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सेमी क्रिटिकल जोन में बालोद व गुंडरदेही ब्लॉक को शामिल किया गया है। इन ब्लॉकों में भी तेजी से भू-जल स्तर नीचे जा रहा है। जल दोहन में रोक नहीं लगी तो आने वाले दिनों में ये ब्लॉक भी क्रिटिकल जोन में आ सकता है। जिले में भू-जल स्तर सुधारने जिला प्रशासन ने अभियान चलाकर प्रयास किया था। प्रयास काफी अच्छा रहा, लेकिन भू जल स्तर में विशेष सुधार नहीं देखा गया। जिला प्रशासन के इस प्रयास की सराहना भारत सरकार ने की है और बेहतर कार्य के लिए बालोद जिला को हाल ही में सम्मानित भी किया है। पर केंद्रीय भू-जल बोर्ड की रिपोर्ट जिले के लिए खतरे से कम नहीं है।
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पीएचई के सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक जिले में भूजल स्तर साल 2017 से 2024 तक घटते क्रम पर रहा। स्थिति को सुधारने कई प्रयास किए गए। तीन साल पहले मिशन जल शक्ति को लेकर गुरुर ब्लॉक में जलशक्ति व जल संचय नाम से विशेष अभियान चलाकर जल बचाने का अभियान शुरू किया गया। घर- घर व सरकारी दफ्तरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया गया, लेकिन वे भी टूट-फूट गए। अब फिर लोग लापरवाही बरतने लगे हैं।े
वर्ष - भूजल स्तर मीटर में (औसत)
2017 - 19
2018 - 19.50
2019 - 19.50
2020 - 21
2021 - 21
2022 - 21.50
2023 - 25
2024 - 27
2025 - 20-24
2026 - 20-22
(आंकड़े पीएचई के मुताबिक)
जिले के हर गांव की गाली में अब डामरीकरण और सीमेंटीकरण होने के कारण बारिश का पानी जमीन के अंदर नहीं जा पा रहा। पानी सीधे नालों में चला जाता है। गर्मी में भी धान की फसल लेने से भू जल स्तर में कमी आ रही है। धान की फसल में अधिक पानी का उपयोग होता है। घरों व सरकारी कार्यालय में रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का न होना। इसके अलावा जरूरत के अनुसार नदी नालों में एनीकट निर्माण न होना भी गिरते भूजल स्तर का बड़ा कारण है।
कृषि विभाग के उपसंचालक आशीष चंद्राकर ने कहा कि किसानों को गर्मी के दिनों में धान की बजाय दलहन-तिलहन की खेती करने प्रेरित करते हैं। कई किसान जागरूक हैं, कई किसानों को अभी भी जागरूक करने की जरूरत है। अच्छी बात यह है कि इस साल किसानों ने दलहन व तिलहन की फसल ज्यादा ली है और उत्पादन भी अच्छा हुआ है।
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Published on:
20 Apr 2026 11:28 pm
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