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CG Traditional Festival : पोरा-जांता व नंदी बैल की पूजा कर ठेठरी-खुरमी का लगाया भोग

पोला पर्व पर ग्रामीण सहित शहरी क्षेत्रों में घर-घर पोला-जांता व नंदी बैल की पूजा अर्चना कर ठेठरी-खुरमी का भोग लगाया गया। पूजा के बाद बच्चे नंदी बैल (नादिया बैल) लेकर खेलते नजर आए। वहीं लड़कियां पाेरा-जांता के साथ खेलती नजर आईं।

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पोला पर्व पर ग्रामीण सहित शहरी क्षेत्रों में घर-घर पोला-जांता व नंदी बैल की पूजा अर्चना कर ठेठरी-खुरमी का भोग लगाया गया। पूजा के बाद बच्चे नंदी बैल (नादिया बैल) लेकर खेलते नजर आए। वहीं लड़कियां पाेरा-जांता के साथ खेलती नजर आईं।

Pola-Janta : बालोद जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्रों में पोला का पर्व मनाया गया। घर-घर में नंदी बैल की पूजा कर ठेठरी-खुरमी का भोग लगाया गया। किसानों ने अच्छी फसल की कामना की। गलियों में छोटे बच्चे नंदी बैल लेकर खेलते नजर आए। लड़कियां भी चूकी-पोरा लेकर समूह बनाकर खेल में जुटी रहीं। घर-घर विभिन्न पकवान बनाए गए। भगवान भोलेनाथ की सवारी नंदी की विशेष पूजा कर भोग लगाया गया।

नंदी बैलों की रेस कराते दिखे बच्चे

पोला को लेकर कुछ दिन पहले से त्योहारी माहौल नजर आने लगा था। बाजार में बड़ी संख्या में नंदी बैल बिकने पहुंचे थे। लोगों ने बच्चों के लिए नंदी बैल, चूकी पोरा व अन्य सामानों की खरीदारी की। त्योहार को लेकर छोटे बच्चों में विशेष उत्साह देखने को मिला। घरों में नंदी बैल की विधि-विधानपूर्वक से पूजा-अर्चना की गई। बच्चों ने अपने बैलों की सजावट भी की थी। कई बच्चे बैलों की रेस लगाते रहे तो कई लोगों ने दिनभर नंदी बैल लेकर घूमने के बाद एक-दूसरे के लिए बैल के साथ टक्कर भी कराई। ये साबित किया कि किसका बैल अधिक मजबूत है।

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लड़कियां चूकी पोरा के साथ पकवान बनाते नजर आई

लड़कियों ने घर गृहस्थी में प्रयुक्त होने वाले सभी सामानों को लेकर चुकी पोरा का खेल खेलती नजर आईं। खेल-खेल में तरह-तरह के पकवान बनाकर एक-दूसरे को खिलाती रहीं। नंदी बैल को लेकर छोटे बच्चे भी घरों में पकवान खाने पहुंचते रहे।

बाजार में सुबह से रही रौनक

पोला के दिन भी घड़ी चौक, बुधवारी बाजार में सुबह से रौनक रही। नंदी बैल, चूकी पोरा और अन्य सामानों की अच्छी बिक्री हुई। कारोबारियों ने बताया कि बाजार में 50 से लेकर 100 रुपए तक नंदी बैल की बिक्री हुई। चूकी 70 रुपए सेट तक बिका।

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पोला पर्व के बाद बैलों को मिलता है आराम

पोला पर्व पर बैलों की अच्छी सेवा की गई। हर किसान ने बैलों को अच्छे से तैयार कर माथे पर कुमकुम, गले में माला के साथ घंटी व घुंघरू भी पहनाकर सजाया। भगवान शिव की सवारी नादिया स्वरूप बैल की पूजा कर आशीर्वाद लिया। ग्रामीण किसान हरिराम साहू, सहदेव राम साहू, पूरन साहू, ईश्वर साहू, पुष्कर साहू ने बताया कि पुराने जमाने से पीढ़ी के अनुसार वे इस पर्व को मनाते आ रहे हैं।